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तुर्की में विरोध प्रदर्शन- ”तक्सीम, फासीवाद का कब्रगाह होगा।”

asia (3)अपने देश की सरकार से, तुर्की की आम जनता की सहमति कहीं नहीं बनती, चाहे वह अमेरिका के समर्थन में सीरिया पर हमले का मामला हो, या नाटो सेना की मौजूदगी। चाहे वह मुक्त व्यापार की आर्थिक नीतियां हों, या विकास के नाम पर सामाजिक असमानताओं को बढ़ाने की स्थितियां। देश की आम जनता इस्लामी जनतंत्र के नाम पर सरकार के फासिस्ट तौर-तरीकों के खिलाफ है।

तुर्की की सरकार, आम जनता के संघर्षों का प्रतीक बने गिजी पार्क और तक्सीम चौक को, उनकी पहुंच से दूर रखना चाहती है, मगर सरकार विरोधी प्रदर्शनों का विस्तार होता जा रहा है। मुददे आपस में जुड़ते जा रहे हैं। आज तुर्की की आम जनता क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के साथ, अपने देश में वास्तविक जनतंत्र के लिये संघर्ष कर रही है।

29 अगस्त को, तुर्की के एयरबेस – इन्सर्लाइक – के बाहर, सीरिया पर होने वाले किसी भी हमले के खिलाफ तुर्की की आम जनता ने भारी विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों के पोस्टर पर लिखा था-

”हमें युद्ध नहीं चाहिये।”

”सीरिया हमारा बंधु देश है।”

अमेरिका और नाटो देशों के लिये तुर्की का यह एयरबेस इसलिये महत्वपूर्ण है, कि हवार्इ मार्ग से, एक घण्टे से भी कम समय में, सीरिया की सीमा तक पहुंचा जा सकता है।

तुर्की की एरडोगन सरकार सीरिया के खिलाफ सख्त कार्यवाही की पक्षधर है। सीरिया के संकट को गृहयुद्ध में बदलने के लिये अमेरिका और पश्चिमी देशों की तरह वह बराबर की हिस्सेदार है। तुर्की की सीमा से ही अरब और एशियायी देशों के आतंकवादियों का घुसपैठ कराया गया, विद्रोहियों को प्रशिक्षण भी यहीं दिया गया। तुर्की सेना की सक्रियता सीमा पर बढ़ गयी है।

डागन न्यूज एजेन्सी की रिपोर्ट के अनुसार -31 अगस्त को तुर्की की सेना के उच्च पदाधिकारियों की एक टीम ने सीरिया से लगे तुर्की की सीमा का निरिक्षण किया। तुर्की की थल सेना के चीफ आफ जनरल स्टाफ ने कहा है कि ”अमेरिकी सेना के द्वारा सीरिया के खिलाफ प्रस्तावित हमले से हम चिंतित नहीं हैं। हमने जरूरी तैयारियां कर ली है।”

आम जनता के भारी विरोध के बाद एरडोगन सरकार ने आवश्यकता होने पर सैन्य कार्यवाही की अनुमति संसद से हासिल कर ली है। नाटो देशों की मिसाइलों की तैनाती हो चुकी है। सीमांत क्षेत्रों में सैन्य टुकडियां एवं टैंकों के दस्ते को पहुंचाया जा चुका है। एक सीमा तक हमले का निर्णय प्रधानमंत्री के पास आ गया है। वो बशर-अल-असद सरकार को उखाड़ फेंकना चाहते हैं। 29 अगस्त को एरडोगन ने कहा- ”एक सीमित हमला हमारे लिये संतोषजनक नहीं होगा। कोसोव की तरह के हस्तक्षेप का निर्णय लिया जाना चाहिये। जिसका मकसद सीरिया से असद सरकार को उखाड़ फेंकना हो।”

सितम्बर को एरडोगन से पूछा गया था, कि ”सीरिया के खिलाफ अमेरिकी नेतृत्व में यदि हमला होता है, तो तुर्की की क्या भूमिका होगी?” उन्होंने कर्इ संभावनाओं का जिक्र करते हुए कहा- ”यह स्थितियों पर निर्भर करता है।”

तुर्की की मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, तुर्की एयरफोर्स के कर्इ युद्धक विमानों ने सीरिया की सीमा पर उड़ानें भरी। किलिस और गाजियन टैप प्रांत में टैंकों की तैनाती की गयी है। तथा अतिरिक्त सैन्य टुकडियों की भी तैनाती की गयी है।” हालांकि इस बारे में तुर्की के रक्षा विभाग ने कोर्इ जानकारी नहीं दी है।

एरडोगन सरकार बदलते क्षेत्रीय संतुलन और बदलते विश्व परिदृश्य का सही आंकलन नहीं कर रही है, जहां अमेरिकी वर्चस्व को रूस और चीन की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, और जहां सीरिया पर सीमित सैन्य कार्यवाही संभव नहीं है। सीरिया पर किया गया अमेरिकी एवं उसके मित्र देशों का हमला क्षेत्रीय युद्ध की शुरूआत होगी, जिसके विस्तार को रोक पाना संभव नहीं है।

एरडोगन सरकार तुर्की की आंतरिक स्थितियों का भी सही आंकलन नहीं कर पा रही है, जहां सरकार विरोधी प्रदर्शनों का विस्तार अलग-अलग क्षेत्रों में भी होता जा रहा है। वामपंथियों के दमन की कार्यवाही ने भी, नयी वर्गगत राजनीतिक चेतना को जन्म दिया है। सीरिया के मुददे के अलावा विश्वविधालयीन क्षेत्रों और प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिये गये लोगों की रिहार्इ का मुददा भी तूल पकड़ चुका है।

7 सितम्बर को, अंकरा के विश्वविधालय परिसर में, सरकार के पुर्ननिर्माण योजना के खिलाफ हुए प्रदर्शन में छात्रों और पुलिस के बीच झडपें हुर्इं। ‘मिडिल-इस्ट टेकिनकल यूनिव्हरसीटी’ के सैंकड़ों छात्रों को खदेड़ने के लिये पुलिस ने रबर बुलेट और आंसू गैस का उपयोग किया। छात्र विश्वविधालय परिसर में म्यूनिस्पल के द्वारा सड़क निर्माण का विरोध कर रहे थे। क्योंकि इस सड़क की वजह से 3,000 से ज्यादा पेड़ प्रभावित होते। वैसे भी, यह अंकरा का सबसे हरियाली भरा क्षेत्र है। छात्र जिसे किसी भी कीमत पर प्रभावित होने देना नहीं चाहते हैं।

गिजी पार्क के एक प्रदर्शनकारी ने, सवालों का जवाब देते हुए पूछा था- ”आप क्या सोचते हैं कि हम चंद पेड़ों के लिये लड़ रहे हैं?” और जवाब भी उसने ही दिया कि ”अब यह लड़ार्इ सरकार और उसकी नीतियों के खिलाफ है। हम अब पूरे सिस्टम को बदलना चाहते हैं।” छात्रों का यह विरोध हजारों पेड़ और पर्यावरण के अलावा सरकार और सिस्टम को बदलने की है। उनके भीतर गिजी पार्क और तक्सीम चौक की नाराजगी है।

9 सितम्बर को इस्ताम्बुल में सैंकड़ों प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुर्इं। यह प्रदर्शन जून में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शन के दौरान एक 14 साल के लड़के बर्किन एल्वन के गंभीर रूप से घायल होने को लेकर हुआ। जून में हुए प्रदर्शन के दौरान उस लड़के को टीयर्स गैस कनस्तर से गंभीर चोट लगी और वह अब तक कोमा में है। इस्ताम्बुल के अदालत की और बढ़ते प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिये पुलिस ने हमला किया। दोनों ओर से जवाबी कार्यवाहियां हुर्इं। पुलिस वाटर कैनन और टियर्स गैस का उपयोग कर रही थी, और प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थर और पेट्रोल बम फेंके।

10 सितम्बर को दक्षिण तुर्की के शहर अंताक्या के सरकार विरोधी प्रदर्शन में एक 22 साल का व्यकित मारा गया। पुलिस के द्वारा फायर किया गया टीयर्स गैस कन्टेनर उसके सिर पर लगा और उसकी मौत हो गयी। प्रदर्शनकारी कोमा में पड़े 14 साल के घायल बच्चे पर की गयी हिंसक कार्यवाही के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे।

डागन न्यूज एजेन्सी के अनुसार 22 वर्षीय अहमेत अताकान की मौत ने इस्ताम्बुल में भी हजारो-हजार प्रदर्शनकारियों को सड़कों पर ला दिया। जिनके खिलाफ भी पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिये टियर्स गैस और रबर बुलेट का उपयोग किया। प्रदर्शनकारियों ने तक्सीम चौक के बाहरी इलाके में प्रदर्शन किये। उन्होंने सरकार विरोधी नारे लगाये- ”तक्सीम फासीवाद का कब्रगाह बनेगा।”

अताकान के अंतिम संस्कार के दिन हताय में और राजधानी अंकरा में भी सरकार विरोधी प्रदर्शन हुए। तुर्की के कर्इ बड़े शहरों में भी इस हत्या के खिलाफ जनप्रदर्शन हुए। 12 सितम्बर को भी विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी रहा, जिसके खिलाफ सरकार का रवैया सख्त था। पुलिस ने इस मौत को एक हादसा बताया और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की। ढेरों लोगों को हिरासत में लिया गया।

सरकार के ऐसे दमन और सीरिया के लिये उसकी नीतियों ने तुर्की की आम जनता को इतना नाराज कर दिया है, कि यदि अमेरिका या नाटो देशों के द्वारा सीरिया पर हमला हो जाता है, तो एरडोगन सरकार और साम्राज्यवादी फासिस्ट ताकतों के खिलाफ तुर्की में एक ऐसे संघर्ष की शुरूआत हो जायेगी, जिसे संभाल पाना तुर्की की सरकार के बस में नहीं होगा। अमेरिकी सरकार ने जिस तरह मिस्त्र के राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी के साथ सत्ता से बेदखल करने का खेल खेला, वह खेल तुर्की के प्रधानमंत्री एरडोगन के साथ भी खेला जा सकता है। अमेरिकी सरकार और पश्चिमी ताकतें राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की अपनी हरकतों से बाज नहीं आयेंगी।

यदि तुर्की की आम जनता यह कहती है, कि ”हम युद्ध नहीं चाहते।” ”सीरिया हमारा बंधु देश है।” तो सरकार को यह भी सोचना चाहिये कि वह यह भी कह रही है कि ”तक्सीम चौक फासीवाद का कब्रगाह होगा।”

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