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चिली में 40 साल पहले हुए तख्ता पलट के खिलाफ जन-प्रदर्शन!

latine america11 सितम्बर 1973 में, अमेरिकी सहयोग से चिली में अलेंदे सकरार का तख्तापलट किया गया था। 40 साल पहले। 40 साल बाद भी, अमेरिकी सरकार के इस कारनामें का अंत नहीं हुआ है। लोग जानना चाहते हैं, 40 साल पहले जिन्हें हिरासत में लिया गया, वो कहां हैं? इस तख्तापलट में 3,200 लोग मारे गये थे, और 38,000 लोगों को हिरासत में लिया गया, जेलों में डाल दिया गया। इस घटना के विरोध में 8 सितम्बर को 60,000 से अधिक चिलीवासियों ने रैलियां निकाली, प्रदर्शन किये। कुछ प्रदर्शनकारियों ने अपने उन परिजनों की तस्वीरें ले रखी थी, तख्तापलट के बाद जिन्हें जनरल अगुस्तो पिनोशे की सरकार ने या तो अगवा करा लिया या जिन्हें मार डाला गया।

प्रदर्शनकारी नारे लगा रहे थे- ”चालीस साल पहले हुए तख्तापलट को हम नहीं भूले हैं।”

इस विरोध प्रदर्शन का समापन उस समाधी स्थल पर हुआ, जिसे पिनोशे सरकार की तानाशाही में मारे गये लोगों की याद में बनाया गया है। लोरीना पिजारो ने कहा- ”चालीस साल हो गये, हम आज भी सत्य और न्याय की मांग कर रहे हैं। जो हमें आज तक नहीं मिला। हम यह जानना चाहते हैं, कि हमारे प्रियजनों के साथ क्या हुआ? क्यों वो आज तक लापता दर्ज हैं?”

इन प्रदर्शनकारियों के खिलाफ चिली पुलिस ने सख्त कार्यवाही की। उन्हें खदेड़ने और तितर-बितर करने के लिये अंश्रु गैस के गोले और वाटर कैनन का उपयोग किया गया। आर टी (रसियन टीवी) टीम का कहना है कि ”सेनटियागो के सल्वाडोर अलेंदे समाधी के करीब पुलिस ने शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे लोगों को हिंसक तरीके से वहां से खदेड़ने का काम किया।” जबकि चिली की पुलिस का कहना है कि ”उसने टियर्स गैस और वाटर कैनन का उपयोग उन 100 प्रदर्शनकारियों पर किया, जिन्होंने बैरिकेटस बना कर सड़कों पर फायर करना शुरू कर दिया था।” इस दौरान एक अफसर घायल हुआ और 8 लोगों को हिरासत में लिया गया।

11 सितम्बर को भी दसो हजार लोगों ने सल्वाडोर अलेंदे सरकार के तख्तापलट की याद में रैलियां निकाली।

राजधानी सेनटियागो में हुए एक समारोह में चिली के राष्ट्रपति सेबसिटयन पिनेरा ने कहा- ”चालीस साल बाद भी भले ही हम सबकुछ भूले नहीं, मगर अतीत के कडुवे अनुभव से निकलें।” उन्होंने 1973 से 1990 तक पिनोशे की तानाशाही के दौरान किये गये मानवाधिकारों के उल्लंघन और दमन के कार्यवाही की निंदा की।

पिनोशे के द्वारा अमेरिकी सहयोग से अलेंदे सरकार का तख्तापलट किये जाने के बाद चिली में वामपंथी संगठनों, ट्रेड यूनियनों और जनसंगठनों को बुरी तरह कुचला गया। अलेंद्र समर्थक और वामपंथियों की बड़े ही सुनियोजित तरीके से हत्यायें की गयीं। ‘रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट मोमेण्ट फार द रिवोल्यूशनरी लेफ्ट’ के न्यूज पेपर ‘पूनतो फाइनल’ के पूरे कर्मचारियों को उनके कार्यालय में घुस कर गोली मार दी गयी। सेनटियागो के नेशनल फुटबाल स्टेडियम को सेना ने यातना शिविर में बदल दिया, जहां सैंकडों लोगों की हत्यायें की गयीं।

इस तख्तापलट के मानसिक एवं शारीरिक यातना को झेलने वाले ऐडम ने 1998 में ‘इन्डिपेनडेन्ट’ के एक आलेख में बताया था कि ”वहां दो कतारें बनी थीं, जिन्हें हम ‘जीवन की कतार’ और ‘मृत्यु की कतार’ कहा करते थे। एक कतार बाहर जाती थी, उस स्टेडियम से दूर, मगर, दूसरी कतार अंदर की ओर जाती थी।” जहां जिंदगी नहीं, यातना से भरी मृत्यु थी।

श्री शाश के अनुसार ”वहां उन्हें दस दिनों तक रखा गया। उस दौरान 400 से 600 लोगों को गोली मारी गयी। जहां गोली मारी जाती थी, वह जगह, उस जगह से थोड़ी दूरी पर थी, जहां वो अपनी पत्नी के साथ डरे-सहमे से बैठे रहते थे।” उन्होंने बताया- ”पनोचे मजदूर वर्ग के नेतृत्वकर्ताओं और ऐसे बुद्धिजीवियों के पूरी पीढ़ी को खत्म करने की कोशिश कर रहा था।” जिसे अमेरिका का समर्थन हासिल था। अलेंदे सरकार का तख्तापलट उसकी साजिश थी।

अलेंदे की सरकार ने चिली में कर्इ महत्वपूर्ण ऐसे सुधार किये, जिसे अमेरिकी सरकार और देश के प्रतिक्रियावादी स्वीकार नहीं कर सके। उन्होंने देश के कर्इ महत्वपूर्ण उधोग -ताम्बे के खदान और बैंकिंग क्षेत्रों का राष्ट्रीयकरण कर दिया। साथ ही उन्होंने भूमि सम्बंधी सुधार भी किये। शिक्षा, आवास और स्वास्थ्य एवं चिकित्सा के क्षेत्र में भी वे ऐसे ही सुधार के पक्षधर थे। आज विकास के जरिये जिस समाजवादी समाज को लातिनी अमेरिकी देशों में सम्मानित जगह मिल गयी है, अलेंदे ने उसी सोच के तहत चिली के निर्माण की योजना की शुरूआत की थी। उन्होंने क्यूबा से भी अपने सम्बंधों की पुर्नस्थपना की।

उस समय अमेरिका के राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन थे। अमेरिका के नेशनल सिक्यूरिटी सलाहकार हैनरी कीसिंजर ने चिली के संदर्भ में कहा था- ”मेरी समझ में यह नहीं आ रहा है, कि क्यों हम एक देश को, अपने ही लोगों की गैरजिम्मेदाराना हरकतों की वजह से, उसे खड़े-खड़े कम्युनिस्ट बनते हुए देखें?” और चिली की अलेंदे सरकार को तख्तापलट की साजिशों को अंजाम दिया गया।

अमेरिकी राष्ट्रपति निक्सन ने सीआर्इए को चिली की अर्थव्यवस्था को तोड़ने, उसे तहस-नहस करने का आदेश देते हुए कहा कि ”चिली की अर्थव्यवस्था की बुरी स्थिति बना दो।” अमेरिकी सरकार ने चिली पर आर्थिक प्रतिबंधों को थोप दिया। सीआर्इए ने वहां राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने के लिये अमेरिकी समर्थक प्रतिक्रियावादी ताकतों को संगठित किया और सरकार विरोधी आंदोलनों एवं हड़तालों को भारी वित्तीय सहयोग दिये। सेना को उसने तख्तापलटने का आदेश दिया।

चिली में सेना को सत्ता संभाले चंद सप्ताह भी नहीं हुए होंगे, कि जनरल अगुस्तो पिनोशे ने ब्रेड की कीमत को 11 एसकुदो (चिली की मुद्रा) से 40 एसकुदो कर दिया। चिली की आम जनता सक्ते में आ गयी। खाधान्न की कीमतें आसमान छूने लगीं। आर्थिक स्थिरता और मुद्रास्फिती को दूर रखने के लिये कर्मचारियों के वेतन को रोक दिया गया। देश की आम जनता गरीबी की चपेट में आती चली गयी। एक साल से भी कम समय में चिली में बे्रड की कीमत में 36 गुणा की वृद्धि हो गयी। देश की 85 प्रतिशत जनसंख्या देखते ही देखते गरीबी की सीमारेखा के नीचे चली गयी।

अर्थव्यवस्था को सदमें में डाल देने की यह योजना अमेरिका के शिकागो में, वहां के इकोनामी ग्रूप -‘शिकागो ब्वायज़’ के द्वारा बनार्इ गयी।

चिली में 1990 में भले ही अगुस्तो पिनोशे की तानाशाही का अंत हो गया, मगर वहां संघर्ष अभी भी जारी है। नवउदारवादी नीतियों की वजह से, आम लोगों की स्थिति पहले की तरह ही है, सरकारी दमन का भी अंत नहीं हुआ है।

मगर, पिछले तीन सालों से, चिली की ‘श्रेणी विभाजित शिक्षा पद्धति’ के खिलाफ शुरू हुआ, छात्र आंदोलन अब व्यवस्था विरोधी जनसंघर्ष में बदल गया है। छात्रों के इस आंदोलन को न सिर्फ चिली की आम जनता, बल्कि लातिनी अमेरिकी देशों एवं विश्व का जनसमर्थन मिल रहा है। अलेंदे का तख्तापलट आज के संदर्भों से जुड़ गया है। लातिनी अमेरिकी देशों के लिये अमेरिकी हस्तक्षेप और फासिज्म के खिलाफ संघर्षों से जुड़ गया है।

11 सितम्बर को वेनेजुएला में भी, चिली में हुए तख्तापलट की याद में ‘फासीवाद विरोधी रैली’ का आयोजन किया गया। जिसमें राष्ट्रपति मदुरो से लेकर नेशनल असेम्बली के प्रेसिडेण्ट कैबीलो ने भाग लिया।

वेनेजुएला के विदेश मंत्रालय द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार यह रैली सुबह 9 बजे सेण्ट्रल यूनिव्हसीटी आफ वेनेजुएला के प्लाजा सल्वाडोर अलेंदे से शुरू हो कर शहर के मध्य से होते हुए ल्बगुनो बि्रज पर जा कर समाप्त हुर्इ। यह बि्रज वेनेजुएला में 2002 में हुए तख्तापलट के दौरान मारे गये लोगों का स्मारक है। जो शावेज और समाजवादी एकजुटता का भी प्रतीक है, जिसकी वजह से ही अमेरिकी सहयोग से किया गया तख्तापलट 48 घण्टे भी चल नहीं सका।

latine america (2)इस रैली का आयोजन संगठित वाममोर्चा -‘ग्रेट पेटि्रयाट पोल’ के द्वारा किया गया था, जिसे वेनेजुएला के राष्ट्रपति ने बुलाया था। उन्होंने ‘टविटर’ पर लिखा- ”चिली के पूर्व राष्ट्रपति सल्वाडोर अलेंदे हमारे लिये इस बात के आदर्श हैं, कि कैसे इमानदारी से लातिनी अमेरिका में समाजवाद के लिये संघर्ष करना है।” उन्होंने कहा- ”आज हम फासिज्म के खिलाफ समाजवादी जनतंत्र और अलेंदे के सम्मान में ‘मार्च’ कर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि ”इस आयोजन का उपयोग ‘सीरिया के खिलाफ युद्ध के खतरे’ की निंदा करने के लिये किया जायेगा।”

नेशनल असेम्बली के प्रेसिडेण्ट कैबीलो ने कहा ”चिली के फासिज्म को याद इसलिये भी रखें, कि लातिनी अमेरिका में फासिज्म की वापसी न हो।”

इस आयोजन का नेतृत्व विदेश मंत्री इलियास ने किया। उप राष्ट्रपति जार्ज आर्रेआजा ने भी भाग लिया। उन्होंने कहा ”हमारे अमेरिका में समाजवादी व्यवस्था को लागू करने की कोशिश करना (वो ऐसा मानते हैं)- असम्भव है। जनतंत्र के चुनावी प्रक्रिया से तो और भी कम।” मगर उनकी कोशिशें नाकाम हुर्इं और वेनेजुएला में जनतांत्रिक चुनाव के जरिये समाजवादी व्यवस्था का निर्माण हुआ।

भूमि एवं कृषि मंत्री युआन गिल ने कहा ”लोग इस संघर्ष के प्रति र्इमानदार हैं। वो पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं, कामरेड कमाण्डेन्ट शावेज के स्वतंत्रता और समाजवाद के झण्डे को बुलंद करने के लिये प्रतिबद्ध हैं।”

विश्व में चिली के इस तख्तापलट के प्रति नयी जनचेतना का विकास हुआ है। इण्टरनेट और सोशल वेबसार्इट पर अमेरिका पर हुए प्रचारित आतंकी हमले- 911 से ज्यादा 40 साल पहले हुए चिली के तख्तापलट के प्रति जागरूकता थी।

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