Home / विश्व परिदृश्य / लातिनी अमेरिका / वेनेजुएला में कम्यूनों के जरिये, समाजवादी समाज के विकास का प्रस्ताव

वेनेजुएला में कम्यूनों के जरिये, समाजवादी समाज के विकास का प्रस्ताव

latine america (3)राष्ट्रपति निकोलस मदुरो की सरकार वेनेजुएला में कम्यूनों का निर्माण कर रही है। उसकी कोशिश हयूगो शावेज के द्वारा शुरू किये गये, समाजवादी समाज के निर्माण कार्य को पूरा करना है। जिसकी शुरूआत भले ही शावेज ने वेनेजुएला में की थी, मगर उनकी सोच लातिनी अमेरिका और कैरेबियन देशों की महाद्वीपीय एकजुटता और सामाजिक विकास के जरिये समाजवाद की थी। और यह सच है कि वेनेजुएला में जो होता है, उसका प्रभाव लातिनी अमेरिकी देशों पर अनिवार्य रूप से पड़ता है, और वेनेजुएला के सामने आज भी क्यूबा का आदर्श है।

शावेज के ‘स्ट्रीट गर्वमेण्ट’ के प्रोग्राम ने सरकार को असेम्बली और राजभवनों से निकाल कर आम जनता के बीच सड़कों पर खड़ा करने की शुरूआत की थी। निकोलस मदुरो ने सरकार को सड़कों पर खड़ा कर दिया। सामाजिक विकास योजनाओं में न सिर्फ आम जनता की हिस्सेदारी को बढ़ाने का काम किया, बल्कि उसके निर्धारण और निर्माण की जिम्मेदारी भी देश की आम जनता को सौंपने की पहल कर दी है। जिसमें सरकार महत्वपूर्ण सहयोगी है।

शावेज ने राष्ट्रीयकरण और उत्पादन के साधन पर मजदूरों के अधिकार को वैधानिक मान्यता दी और देश के महत्वपूर्ण औधोगिक इकार्इयों का राष्ट्रीयकरण कर, उसे मजदूरों के नियंत्रण में देने की शुरूआत की। निकोलस मदुरो ने इसे वर्गगत आर्थिक एवं राजनीतिक चेनता में बदलने की पहल की है। खाध तेल एवं उससे बने दैनिक उपयोग के सामान की उत्पादक इकार्इ डियाना ने न सिर्फ महत्वपूर्ण उपलबिधयां हासिल की, बल्कि मैनेजमेण्ट पर मजदूरों के पूर्ण नियंत्रण की ओर कदम भी बढ़ा दिया है, जिसे वेनेजुएला की सरकार का सहयोग एवं समर्थन हासिल है।

शावेज ने अपना आखिरी चुनाव जीतने के बाद, उस समय उपराष्ट्रपति निकोलस मदुरो से पूछा था- ”हमारे कम्यून कहां हैं?” और उन्होंने अपनी सरकार के अधूरे कामों को निर्ममता से सवालों के दायरे में खड़ा किया था। आज राष्ट्रपति निकोलस मदुरो की सरकार कम्यूनों के निर्माण को राष्ट्रीय मुददा बना चुकी है। उसकी पहली वरियता कम्यूनों का निर्माण है। जिसके बिना समाजवादी समाज की रचना नहीं की जा सकती।

15 अगस्त को निकोलस मदुरो ने अपनी सरकार से कहा- ”वो देश में कम्यूनों के निर्माण को अपना और अधिक समर्थन दें।” और उन्होंने कर्इ शुरूआती कदम के प्रस्तावों को रखा, जिसके माध्यम से यह किया जा सकता है। उन्होंने अपनी सरकार के पुर्ननिर्माण की भी घोषणा की, ताकि सरकार अपने निर्धारित लक्ष्य को पा सके।

अपने साप्ताहिक टेलिविजन कार्यक्रम -‘बोलिवेरियन संवाद’ में मदुरो ने अपने कैबिनेट से कहा कि ”वो वेनेजुएला में कम्यूनों को संगठित करें और उसके निर्माण को विस्तार देने का काम करें।” उन्होंने कहा- ”कम्यून के मुददे को राष्ट्रीय मुददा बनाया जाये। जो कम्यून पहले से है, उन्हें मजबूत करने के लिये उन्हें संगठित करें, उन्हें सहयोग दें, ताकि क्षेत्रीय रूप से एक मजबूत एवं ठोस समाजवादी समाज की रचना की जा सके।” राष्ट्रपति मदुरो ने इसकी जिम्मेदारी उपराष्ट्रपति जार्ज ऐरेयाजा, कम्यून मिनिस्टर रेइनाल्ड इतुरिजा, और सूचना एवं प्रसारण मंत्री दलि राडि्र को सौंपा है।

मदुरो ने शावेज के समय स्थापित किये गये कम्यूनों के बारे में कहा कि ”उन्हें इस अभियान, इस आंदोलन का नेतृत्व करने वाले नेतृत्वकर्ता की भूमिका निभानी होगी। नये कम्यूनों के निर्माण में अपने अनुभवों और अपनी उपलबिधयों का आदर्श पेश करना होगा, उन्हें अपना सहयोग देना होगा, ताकि कम्यूनों के निर्माण के आंदोलन को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया जा सके।”

वेनेजुएला के कम्यूनों का उदगम स्थल कम्यूनल कांउसिल है, जो कि स्थानीय सदस्यों से बना जमीन से जुड़ा संगठन है। जो अपने सामूहिक कार्यक्रम और छोटे तथा सामाजिक कार्यों को आम जनता के आर्थिक सहयोग से पूरो करता है। यह पूरी तरह आत्मनिर्भर इकार्इ है। इस समय वेनेजुएला में 44,000 से ज्यादा रजिस्टर्ड कम्यूनल कांउसिल हैं, मगर मात्र 200 के लगभग ही ऐसे कम्यून हैं, जो वास्तव में अपने कार्यक्रमों को पूरी र्इमानदारी से पूरा कर पा रहे हैं, जिन्हें आदर्श के रूप में पेश किया जा सकता है, जो पूरी तरह विकसित हैं। ये ‘ग्रूप आफ कम्यूनिटी कांउसिल’ से बने हैं। जिन्हें ‘लोकल सेल्फ गर्वनेस’ से जोड़ने की योजना मदुरो सरकार की है। इस प्रक्रिया की पहल हो चुकी है।

सामाजिक विकास, मजदूरों के नियंत्रण में कम्पनियां-कारखाने और ‘कम्यूनों के जरिये’ वेनेजुएला की सरकार देश में ऐसे समाजवादी जनतंत्र का निर्माण कर रही है, जिसके लिये मदुरो सरकार ने कर्इ तात्कालिक कदम उठाये हैं। ‘द कम्यूनिकेशन वार्इस मिनिस्ट्री आफ कम्यूनिकेशन एण्ड पिपुल्स पावर’ का गठन उपमंत्रालय के रूप में किया गया है। जो कम्यून एवं सामाजिक आंदोलन के अनुभवों को प्रचार-प्रसार करेगी। इसके अलावा कम्यून और कम्यूनिटी कांउसिल के रोज-ब-रोज के कामों का सीधा प्रसारण करने के लिये नेशनल टेलीविजन चैनल का निर्माण किया जायेगा। इस बाबत राष्ट्रपति ने कहा कि ”इस नये चैनल पर अंतहीन डाक्यूमेण्ट्री, समाचार और म्यूजिक प्रोग्रामों का प्रसारण किया जायेगा। इनका निर्माण किया जायेगा।” जिसके संयोजन की जिम्मेदारी ‘मिनिस्ट्री आफ कम्यून कम्यूनिकेशन और सार्इंस एण्ड टेक्नोजाजी’ को सौंपी जायेगी।

साल 2009 में वेनेजुएला की सरकार ने मिनिस्ट्री आफ कम्यून की स्थापना की थी।

2010 में ‘कम्यून्स ला’ पास किया गया।

2012 के अक्टूबर में शावेज ने कम्यूनों के निर्माण में अब तक पर्याप्त काम न करने की -अपने ही सरकार की- कड़ी आलोचना की। उन्होंने विदेशमंत्री से उपराष्ट्रपति बनाये गये निकोलस मदुरो से पूछा था- ”कम्यून कहां हैं?” उन्होंने अपनी नाराजगी जाहीर करते हुए कहा था कि ”वो मिनिस्ट्री आफ कम्यून को पूरी तरह समाप्त करने के बारे में विचार कर रहे हैं।” इस पर ‘नेशनल नेटवर्क आफ कमाण्डर्स’ ने लिखित वक्तव्य में दृढ़तापूर्वक स्वीकार किया कि ”पूरे देश में कम्यूनों का निर्माण किया जा रहा है और हम इसे अपनी देख रेख में, अपने नियंत्रण में बढ़ाने का काम कर रहे हैं।”

नेशनल नेटवक्र्स आफ कमाण्डर्स ने अपने पक्ष में तर्क दिया कि ”इस बारे में लगभग ना के बराबर -राष्ट्रीय, क्षेत्रीय एवं स्थानीय मीडिया में जानकारी दी गयी।” उन्होंने यह भी कहा कि ”कोर्इ भी मंत्रालय या संस्थान का निर्माण नहीं किया गया है। जो कम्यून आंदोलन के उददेश्य और उसकी जरूरतों को प्रस्तुत करे।” यही कारण है कि राष्ट्रपति मदुरो ने ‘द कम्यूनिकेशन वार्इस मिनिस्ट्री आफ कम्यूनिकेशन एण्ड पिपुल्स पावर’ की स्थापना की और नेशनल टेलीविजन की स्थापना के प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया।

latine america (4)15 अगस्त मेरिडा राज्य के आनिडयन शहर में मदुरो ने कहा कि ”कम्यूनों को वेनेजुएला के नये प्रोडकिटव इकोनामी माडल (लाभकारि या उपयोगी अर्थव्यवस्था के प्रारूप) में मुख्य होना चाहिये।” जो राज्य की ‘जन-सरकार’ या समाजवादी सरकार के दायित्वों का निर्वाह छोटे रूप में करती है। वेनेजुएला की मौजूदा अर्थव्यवस्था निजीकरण की सीमाओं को तोड़ कर एक समाजवादी अर्थव्यवस्था के निर्माण में लगी है। जिसमें स्वाभाविक रूप से माक्र्स के कम्यून और लेनिन के आपातकालीन या ‘क्रांतिकारी कम्यूनों’ की निर्माणकारी सोच है। उन्होंने विश्लेषित किया कि ”हर कम्यूनल कांउसिल और हर कम्यून का मकसद यह होना चाहिये कि ‘वह लोगों का एक संगठित समूह हो, जो कि, आर्थिक रूप से ‘प्रोडकिटव सोसलिज्म’ -का विकास करे।” उन्होंने कहा कि ”कम्यून हमारे सामाजिक एवं आर्थिक विकास में स्थानीय, क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर, महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिये होना चाहिये।”

कम्यूनों के निर्माण एवं कम्यूनों के जरिये ही समाजवादी समाज, का निर्माण संभव है। शावेज ने जो सवाल उनसे किया था, मदुरो उसी जवाब का निर्माण कर रहे हैं। समाज निर्माण में उनकी भूमिका बढ़ार्इ जा रही है। जिसके तहत राज्य की भूमिका स्वाभाविक रूप से घट जाती है। कम्यून ही धीरे-धीरे सरकार की जगह ले लेते हैं। मगर, ऐसा तब तक नहीं हो सकता, जब तक समाज में वर्गों का असितत्व है। माक्र्स इस बारे में किसी आदशोर्ं से भरे काल्पनिक स्थिति की रचना नहीं करते। उनकी स्पष्ट मान्यता है, कि राज्य एक शोषक इकार्इ है, सर्वहारा का राज्य भी सख्ती से शोषकों का दमन करता है। जिसे वो सर्वहारा वर्ग की तानाशाही कहते हैं।

मगर, लातिनी अमेरिका के समाजवादी देश एवं वेनेजुएला में भी, जहां विकास के जरिये समाजवादी समाज के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है, सर्वहारा वर्ग के अधिनायकत्व के बिना, सामाजिक विकास एवं सतत क्रांति से, पूंजीवाद से समाजवाद की ओर संक्रमण का दौर चल रहा है। राज्य एवं उनकी सरकारों को समाज के बहुसंख्यक वर्ग के पक्ष में खड़ा किया गया है। वेनेजुएला की मदुरो सरकार, सरकार में आमूल-चूल परिवर्तन के प्रस्ताव पर भी काम कर रही है। राष्ट्रपति ने कहा है कि ”हमें एक नयी संरचना को बनाने की जरूरत है।”

Print Friendly

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Select language:
Hindi
English
Scroll To Top