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शाॅवेज! तुम्हारी जगह हमारे बीच है

शाॅवेज! तुम्हारी जगह हमारे बीच हैजिनकी
बाहें उठी रहती थीं,
जो खड़े होते थे अपनों के बीच,
और जिनके लिये
जनसैलाब खड़ा होता था,
उनके लिये
ताबूत में जगह बनाना
अच्छा नहीं लगता।
लगता है-
यह समय
सोने का नहीं है काॅमरेड शाॅवेज!
आराम के लिये
चुना गया वक्त सही नहीं है।

नाराज हैं
हम उन हत्यारों से
जो सोच
और समझ को मारना चाहते हैं,
चाहते हैं
ताबूत को वक्त की जंजीरों से बांधना
कि विकल्पों को
गहरी खाई में उतारा जा सके।
उनके लिये
सोया हुआ आदमी
उठ कर बैठ नहीं सकता।

नाराज हैं
हम आपसे
कि आपने उन्हें यह सोचने का
मौका क्यों दिया?
यह जानते हुए कि ऐसा नहीं होगा।
सरकारें
सड़कों पर आ गयी हैं,
राजपथ अब राजभवनों तक नहीं पहुंचते,
कामगरों की हंथेली पर
सिर्फ मेहनताना नहीं
उनके अधिकारों की फसल उग रही है।
जिंदगी सौगात नहीं, हमारा हासिल है।

नाराज हैं
हम अपने आप से
कि बेपनाह मुहब्बत के लिये,
दुखते मन के साथ, हम रो नहीं सकते,
तुम्हारी
नींद में खलल डालने से
खुद को रोक नहीं सकते,
हम दे नहीं सकते तुम्हें ताबूत की घुटन
हम सड़कों पर हैं,
क्योंकि जो हमारा है,
उसे छीनने की साजिशें चल रही हैं।
तुम्हारी जगह हमारे बीच है।

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