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वेनेजुएला में राजनीतिक अस्थिरता – फरवरी विद्रोह

देश की आम जनता के द्वारा चुनी गयी, और आम जनता के पक्ष में खड़ी वेनेजुएला की समाजवादी सरकार के सामने, समाजवादी समाज के निर्माण और वर्गगत राजनीतिक संस्कृति को विकसित करने के ऐतिहासिक दायित्वों के अलावा कई गंभीर चुनौतियां हैं।

  • वेनेजुएला में प्रतिक्रियावादी ताकतों की एकजुटता और हिंसक जनप्रदर्शन।
  • अमेरिकी सरकार और बाहरी ताकतों का हस्तक्षेप।
  •  महाद्वीपीय जन एकजुटता और महाद्वीप के समाजवादी तथा गैरपूंजीवादी देशों की सुरक्षा।
  •  वैश्विक स्तर पर बन रहे विकास के जरिये समाजवाद की सोच का विस्तार और बहुध्रुवि विश्व की अवधारणां।

125677_05_211710वेनेजुएला का होना, क्यूबा के होने की तरह ही लातिनी अमेरिकी एवं कैरेबियन देशों और विश्व परिदृश्य में, बनते हुए विकल्प की तरह, महत्वपूर्ण हो गया है। क्योंकि ‘21वीं सदी के समाजवाद‘ के रूप में, क्यूबा में, जिस अवधारणां का विकास हुआ, वह वेनेजुएला में ‘विकास के जरिये समाजवाद‘ के रूप में विकसित हुआ है।

और हम यह मानते हैं, कि वेनेजुएला का मौजूदा संकट उसी चेहरे को बिगाड़ने और बिगड़ने न देने का संकट है। जिसका प्रभाव जितना व्यापक होगा, उतना ही दूरगामी भी होना तय है। फरवरी 2014 में, उस पर किया गया -हिंसक प्रदर्शनों का- यह हमला इस बात का सबूत है, कि अमेरिकी साम्राज्यवाद, बाजारवादी वित्तीय ताकतों और उनकी टूटती-बिखरती वैश्विक संरचना के लिये वेनेजुएला का होना गंभीर खतरा बन गया है। उन्होंने देश और महाद्वीप के दक्षिणपंथी ताकतों को आपस में जोड़ कर आर्थिक हमलों के साथ हिंसक प्रदर्शनों की शुरूआत की है। मीडिया वार पहले से ही जारी है। उनके द्वारा इराक, अफगानिस्तान, लीबिया, सीरिया और तीसरी दुनिया के देशों में फैलायी गयी जितनी गंदगी, -हिंसा और दमन की जितनी वारदातें हैं, उसे वो वेनेजुएला के खिलाफ, विश्व समुदाय के सामने पेश कर रहे हैं। उन्हें यह देखने की फुर्सत ही नहीं है, कि उनके मुंह पर कितना थूक और कितना खून पड़ रहा है। वो जिस लोकतंत्र और मानवाधिकार की बातें करते हैं, उसी लोकतंत्र को रोज काला कर रहे हैं। लोकतंत्र को उन्होंने पूंजीवादी व्यवस्था का पर्याय बना दिया है। जबकि लोकतंत्र अपने देश की सरकार पर, आम जनता के अधिकार का पर्याय है। और पूंजीवाद वित्तीय पूंजी की तानाशाही है। और जहां वह है, वहां लोकतंत्र नहीं है।

वित्तीय पूंजी की हिरासत में आज दुनिया की ज्यादातर देशों की सरकारें हैं। मुक्त बाजारवाद या नवउदारवादी वैश्वीकरण राज्य की सरकारों पर वित्तीय पूंजी की पकड़ को मजबूत करने का सिद्धांत है। जिसके खिलाफ वेनेजुएला की सरकार पिछले 15 सालों से खड़ी है। ह्यूगो शाॅवेज जिसकी सूरत हैं। 2 फरवरी 1999 में पहली बार शाॅवेज ने राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी।

और अमेरिकी सहयोग से 11 अप्रैल 2002 को वेनेजुएला के दक्षिणपंथी-प्रतिक्रियावादी ताकतों ने तख्तापलट की नाकाम कोशिश की थी। उनकी कोशिशें आज भी जारी हैं। हो रहे आर्थिक हमले, हिंसक प्रदर्शन और मीडिया वार उनकी कोशिशों का हिस्सा है।

प्रतिक्रियावादी ताकतों ने मान लिया है, कि वेनेजुएला में राजनीतिक अस्थिरता पैदा की जा सकती है। वो अपनी पहली तख्तापलट की नाकामी को 2014 में निकोलस मदुरो सरकार के तख्तापलट की कामयाबी में बदलने पर आमादा हैं। उन्होंने मान लिया है, कि ‘‘शाॅवेज नहीं हैं, इसलिये वो ऐसा कर सकते हैं।‘‘

संवैधानिक तरीके से सत्ता पर अधिकार जमाने की उनकी नीतियों को जब जनसमर्थन का आधार नहीं मिला, तो वो हिंसक हो गये हैं। उन साजिशों का हिस्सा बन गये हैं, जो अपने से अलग समाज व्यवस्था के खिलाफ अमेरिकी सरकार और अंतर्राश्ट्रीय वित्तीय ताकतें तीसरी दुनिया के देशों में करती रही हैं। उन्होंने यह समझना बंद कर दिया है, कि अपने देश की सरकार वित्तीय ताकतें और बाहरी शक्तियां नहीं, देश की आम जनता बनाती है।

यह दुखद है, कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की सोच जाॅर्ज बुश का सहारा लिये चलती है। जिन्हें समझाने की नाकाम कोशिश क्यूबा के राष्ट्रपति राउल कास्त्रो ने की, कि ‘‘ हमें अपने व्यवस्थागत राजनीतिक मतभेदों को भुला कर ही आपसी सम्बंधों को बढ़ाना चाहिये। …..यदि हम आपको समाजवादी लोकतंत्र को स्वीकार करने की सलाह नहीं देते, तो आपसी सम्बंधों के लिये हम पर अमेरिकी लोकतंत्र को स्वीकार करने का दबाव बनाने का आपको अधिकार नहीं है।‘‘ वेनेजुएला के राष्ट्रपति और वेनेजुएला की आम जनता ने की। लातिनी अमेरिकी देशों के संगठन ‘अल्बा‘ और ‘कम्युनिटी आॅफ लैटिन अमेरिकन एण्ड कैरेबियन स्टेट्स‘ ने हवाना सम्मेलन में की, कि ‘‘हमें देखने का नजरिया बदलें‘‘, मगर व्हाईट हाउस न तो अपनी नजर बदल सका, ना ही नजरिया। महाद्वीप की आम जनता और विश्व जनमत बराक ओबामा को समझाने में नाकाम रही है।

यह बराक ओबामा की ना समझी नहीं, बल्कि उनके पीछे खड़ी वित्तीय ताकतों का दबाव है, कि अमेरिकी सरकार यह समझ रही है, कि ‘‘वह इतनी बड़ी ताकत है, कि उसे हराया नहीं जा सकता।‘‘ जबकि उसके कूटनीतिक पराजय के नये दौर की शुरूआत हो चुकी है।

अमेरिकी सरकार यह समझने की भी भूल कर रही है, कि वह यदि मुंह के बल गिर गयी तो दुनिया उसके नीचे दब जायेगी। इसलिये, उसे बने रहने का अधिकार है।

वह विकल्पों के खिलाफ है।

उसकी नाराजगी यही है, कि वेनेजुएला विकास के जरिये समाजवाद की सूरत बन गया है।

अंकल सैम नाराज सिर्फ इसलिये हैं, कि वेनेजुएला की सूरत, उनके जैसी नहीं है।

अंकल सैम पिछले दो दशक से दुनिया को अपनी सूरत देने में लगे हैं, जिसकी किसी को जरूरत ही नहीं है।

वो मानते हैं, कि वेनेजुएला को इराक और लीबिया की तरह तोड़ने की सख्त जरूरत है। सीरिया की तरह गृहयुद्ध में धकेलने और लातिनी अमेरिकी देशों की महाद्वीपीय एकजुटता को तोड़ने की सख्त जरूरत है।

अमेरिकी सरकार और वेनेजुएला की प्रतिक्रियावादी ताकतें यह समझने की भूल कर रही हैं, कि तख्तापलट की जिस घटना को 2002 में अंजाम नहीं दिया जा सका, उसे 2014-15 में अंजाम दिया जा सकता है, जबकि यह पहले से ज्यादा कठिन है, क्योंकि डेढ़ दशक में वेनेजुएला की समाजवादी सरकार में आम लोगों कि न सिर्फ हिस्सेदारी बढ़ी है, बल्कि उनके सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक जीवन का स्वरूप ही बदल गया है। लातिनी अमेरिकी एवं कैरेबियन देशों की एकजुटता पहले से ज्यादा मजबूत हुई है। सहयोग एवं समर्थन की सोच ने महाद्वीपीय सोच को जन्म दिया हैं

जिसमें अमेरिकी सरकार के कारनामों के लिये जगह कम है।इसके बाद भी बराक ओबामा की समझ में यह बात नहीं आयेगी कि शाॅवेज का न होना, वेनेजुएला की कमजोरी नहीं है।

मदुरो सरकार के एक साल से भी कम के कार्यकाल ने, शाॅवेज के न होने की खबर को गलत सिद्ध कर दिया है। उन्होंने शाॅवेज को सोच में बदल कर वेनेजुएला और लातिनी अमेरिकी देशों की एकजुटता के प्रतीक में बदल दिया है। शाॅवेज की राजनीतिक, सामाजिक एवं आर्थिक नीतियों को गंभीरता से लागू किया है। राष्ट्रपति निकोलस मदुरो, नेशनल असेम्बली के अध्यक्ष डिओसडाडो कैबेलो और समाजवादी सरकार ने खुद को शाॅविस्टा -शाॅवेजवादी- प्रमाणित किया है। वेनेजुएला की सेना, कामगर वर्ग, ग्रेट पेट्रियाॅटिक पोल और देश की आम जनता मौजूदा सरकार के साथ है।

‘स्ट्रीट गवर्मेण्ट प्रोग्राम‘ ने सरकार को राजभवनों से निकाल कर सड़कों पर खड़ा कर दिया।

मजदूरों के नियंत्रण में सार्वजनिक क्षेत्रों की औद्योगिक इकाईयों और कम्पनियों को सौंपने की कार्यवाही तेज हो गयी है। जिसने निजीकरण के विरूद्ध राष्ट्रीयकरण की अनिवर्यता बढ़ा दी।

कम्यूनों के जरिये सरकार की जिम्मेदारियों को देश की आम जनता को सौंपा जा रहा है।

जिन सामाजिक विकास योजनाओं, आर्थिक नीतियों और आम जनता के पक्ष में सरकार को खड़ा करने की पहल शाॅवेज ने की थी, मदुरो सरकार के उन्हीं कार्य योजनाओं के खिलाफ गृहयुद्ध जैसी स्थितियां पैदा की गयी हैं। वेनेजुएला में आर्थिक हमले और राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिश हो रही है। आम जनता की चुनी हुई सरकार को अलोकतांत्रिक सरकार करार देने की अमेरिकी साजिशों को अंजाम देने की कारगुजारियां की जा रही हैं। यह प्रमाणित किया जा रहा है, कि मदुरो सरकार, सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों का दमन कर रही है। अमेरिका और पश्चिमी मीडिया लीबिया और सीरिया में आजमाये हुए सारे हथकंडे अपना रही है।

विदेशी मीडिया यह प्रमाणित करने में लगी है, कि ‘सरकार विरोधी प्रदर्शनकारी वेनेजुएला की आम जनता का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।‘ जिन्हें दिसम्बर 2013 में हुए प्रांतीय गर्वनर और मेयर चुनाव में मात्र 24 प्रतिशत मत मिले, और सत्तारूढ़ युनाईटेड सोशलिस्ट पार्टी एवं सहयोगी दलों को 76 प्रतिशत लोगों का विशाल समर्थन मिला। यह संभव नहीं है, कि एक महीने में वेनेजुएला की आम जनता इतनी बदल जाये कि, वह सरकार विरोधी हो जाये, जबकि मदुरो सरकार अपने कार्यकाल के पहले दिन से ही आम जनता के बीच सड़कों पर रही है। उसने शाॅवेज के दशक को सदी की दिशा दी है।

अमेरिकी सरकार और प्रतिक्रियावादी ताकतों ने उस फरवरी माह को अपना निशाना बनाया, जो बरसों से बोलिवेरियन क्रांति और शाॅवेज के नाम रहा है।

2 फरवरी 1999 में शाॅवेज पहली बार वेनेजुएला के राष्ट्रपति बने।

4 फरवरी 1992 में शाॅवेज ने तत्कालीन सरकार का तख्तापलटने की नाकाम कोशिश की थी।

12 फरवरी को ‘यूथ डे‘ मनाया जाता है। 1814 में आजादी की बड़ी लड़ाई लड़ी गयी थी। एक बड़ी लड़ाई की शुरूआत हुई थी।

27 फरवरी 1989 में नवउदारवाद के खिलाफ हुए जनप्रदर्शन पर खुलेआम गोलीबारी की गयी। एक निर्णायक संघर्ष की शुरूआत की गयी।
जिसका हासिल शाॅवेज और बोलिवेरियन क्रांति और विकास के जरिये समाजवाद की अवधारणां है।

2 फरवरी 2014 को राष्ट्रपति निकोलस मदुरो ने घोषणा की, कि सरकार समर्थक ‘ग्रेट पेट्रियाॅटिक पोल काॅलिजन‘ का पुर्ननिर्माण किया जा रहा है। उन्होंने कहा- ‘‘वेनेजुएला की राजनीति में इस संगठन के सामने जमीनी स्तर पर क्रांतिकारी प्रभाव को स्थापित करने की गंभीर जिम्मेदारी है।‘‘

सरकार समर्थकों को दिये अपने अभिभाषण में उन्होंने कहा- ‘‘वेनेजुएला में बोलिवेरियन आंदोलन उस समय अस्तित्व में आया, जिस समय यहां प्रतिरोध, बहिष्कार और दमन था, और ह्यूगो शाॅवेज ने देश में नये राजनीतिक मूल्यों की स्थापना की। हम उन्हीं राजनीतिक मूल्यों के तहत -जो बोलिवेरियन क्रांति और शाॅवेज की देन है- ‘‘वास्तविक लोकतंत्र की स्थापना करने मेे पूरी तरह सक्षम है।‘‘

जिस समय वेनेजुएला की सरकार और वेनेजुएला की आम जनता अपने देश में समाजवादी वास्तविक लोकतंत्र की विरासत को आगे बढ़ाने की नीतियां तय कर रही थी, उसी दिन देश की प्रतिक्रियावादी ताकतों ने साम्राज्यवादी ताकतों के साथ मिल कर उसकी दिशा को बदलने की कसमें खा रहे थे। उस पर घातक हमले की तैयारी को अंजाम देने की पहल कर रहे थे।

leopoldo-lopez2 फरवरी को वेनेजुएला के विपक्ष ने देश भर में आम सभायें की। राजधानी काराकस के समृद्ध इलाके-चचिटो में विपक्ष के नेता लीओपोल्डो लोपेज, एन्टोनियो लेदेज्मा और मारिया कोरिना मचाडो ने मदुरो सरकार को सत्ता से बेदखल करने के लिये चर्चायें की। लेदेज्मा ने कहा- ‘‘सरकार को सत्ता से बेदखल करने के लिये, लोगों को सड़कों पर उतरना चाहिये।‘‘ ताकि वेनेजुएला में राजनीतिक अस्थिरता पैदा की जा सके। प्रतिक्रियावादी ताकतों के असंतोष को जन असंतोष करार दिया जा सके। साम्राज्यवादी ताकतें और उनकी मीडिया तैयार थी। 12 फरवरी को ‘यूथ डे‘ को निशाना बनाया गया। जिस दिन वेनेजुएला की ज्यादातर आम जनता सड़कों पर होती है। लोपेज ने 2 फरवरी की मीटिंग में 12 तारीख को विशाल जनप्रदर्शन की बातें की और कहा कि ‘‘उन सभी को अपना पद छोड़ देना चाहिये, जो सत्ता में हैं। हमारे सामने यह साफ हो गया है, कि मदुरो ही एकमात्र समस्या नहीं हैं, बल्कि वो सभी हमारी समस्या हैं, जो आधिकारिक रूप से सरकारी पदों पर हैं, और जिन्होंने राज्य का अपहरण कर लिया है।‘‘

इस तरह की मीटिंग में हिंसक झड़पें हुईं और तीन लोग घायल भी हुए। घोर दक्षिणपंथी -पापुलर विल पार्टी के क्षेत्रीय संयोजक एडविन गोमाज ने इन झड़पों के लिये मीटिंग में घुस आये घुसपैठियों पर आरोप लगाया। ताल कुआल ने खबर दी है, कि सार्वजनिक बैठक में एक सर्वे बांटा गया, जिसमें लोगों से पूछा गया था- ‘‘वो सत्ता में परिवर्तन कब चाहते हैं?‘‘ विपक्ष की एकजुटता बार-बार बनती और बिगड़ती रही। ईईई ने रिपोर्ट दी कि पूर्व राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार हेनरिक केप्रिलेस ने 2 फरवरी को कहा कि ‘‘विपक्ष के नेता उन्हें विपक्ष के नेतृत्व से हटाना चाहते हैं।‘‘

4 फरवरी से ही विपक्ष समर्थक छात्रों ने हिंसक प्रदर्शन की शुरूआत कर दी।

6 फरवरी को विपक्ष समर्थित छात्रों ने ताचिरा स्टेट के समाजवादी गर्वनर विलियम मोरा के कार्यालय और उनके आवास पर हमले किये। मोरा ने लोपेज को जिम्मेदार ठहरया। वैसे, लोपेज अपने समर्थकों के जरिये निकोलस मदुरो को सत्ता से हटाने का दबाव बनाना चाहते थे। उन्होंने अपने समर्थकों को सड़कों पर उतरने को भी कहा था।

कई विपक्षी नेता और मिराण्डा स्टेट के गर्वनर हेनरिक केप्रिलेस ने लोपेज के इस नीति को गलत बताया। उन्होंने इसे ‘बे-वक्त‘ और ‘राजनीतिक रूप से आत्महत्या‘ करार दिया।

एक सीमा तक यह सच भी है, क्योंकि वेनेजुएला की आम जनता मदुरो सरकार के साथ है, मगर अमेरिकी सरकार और प्रतिक्रियावादी ताकतों का यह वक्त बुरा बीत रहा है। उन्हें हर बात की जल्दी है, क्योंकि विश्व समुदाय विभाजित हो चुका है, और बहुध्रुवि विश्व की अवधारणायें आकार पा चुकी हैं। वो यूरोप और एशिया में रोज गिरती शाख को घटाने के लिये लातिनी अमेरिकी देशों पर अपनी पकड़ चाहते हैं, जहां से उनके तम्बू-कनातों का उखड़ना थम नहीं रहा है। वो सीरिया के कूटनीतिक पराजय को वेनेजुएला की राजनीतिक अस्थिरता के रूप में भरपाई करना चाहते हैं।

राजनीतिक अराजकता का माहौल बनाने के लिये विपक्ष के लोपेज समर्थक और छात्रों ने भारी हिंसा का सहारा लिया। उन्होंने शासकीय भवनों और सरकार समर्थक लोगों पर हमले किये। सार्वजनिक सम्पत्ति और राष्ट्रीय सम्पत्ति को अपना निशाना बनाया। उन्होंने यूथ डे का फायदा उठाया और सरकार समर्थित ‘यूथ डे मार्च‘ में शामिल लोगों के साथ हिंसक झडपें की। जिसमें 2 लोग मारे गये और 25 लोग घायल हुए। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार 30 लोगों को हिरासत में लिया गया।

सुबह के शांति मार्च की मदुरो ने प्रसंशा की थी, मगर कुछ ही देर में माहौल बदल गया। जुआन मोन्टोया नामक एक शाॅविस्टा की विपक्षी प्रदर्शनकारियों द्वारा गोली मार कर हत्या कर दी गयी। वे शाॅवेज के सबसे मजबूत गढ़ समझे जाने वाले बारिओ में कम्युनिस्ट लीडर थे। नेशनल असेम्बली के प्रेसिडेण्ट कैबेलो ने इस हत्या की निंदा की और हथियाबद्ध दक्षिणपंथी गुट पर मोन्टोया को मार गिराने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा- ‘‘वे फाॅसिस्ट हत्यारे हैं।‘‘ उन्होंने फाॅसिस्टों से किसी भी वार्ता के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। यह बात उन्होंने स्पष्ट की, कि सरकार किसी भी समस्या के शांतिपूर्ण समाधान के लिए वार्ता के पक्ष में है, किंतु फाॅसिस्ट ताकतों से वार्ता नहीं हो सकती।

हिंसक प्रदर्शनकारियों ने काराकस के काराबोबो पार्क में एटाॅर्नी जनरल के आॅफिस पर हमला किया। भवन को हानि पहुंचाया। स्थितियों की गंभीरता को देखते हएु महत्वपूर्ण सरकारी भवनों, संस्थानों और प्रतिष्ठानों सहित वेनेजुएला के सरकारी टीवी सेण्टर में भी नेशनल गार्ड को तैनात कर दिया गया। पिछले कई दिनों से जारी हिंसक प्रदर्शनों और वारदातों ने, सरकार की ओर से सख्त कदम उठाने की विवशता पैदा कर दी।

मेरिडा में पिछले कई दिनों से छोटे-छोटे हिंसक प्रदर्शन हो रहे थे, मगर 12 फरवरी को वहां के आन्डियन शहर में सरकार समर्थकों ने एक बड़ा मार्च निकाला और बाकी जगहों पर विपक्ष समर्थकों ने भी बड़ी रैलियों का आयोजन किया। दोनों ही मार्च शांतिपूर्ण थे। मगर हिंसा की शुरूआत तब हुई जब विपक्ष की रैली समाप्त हुई और उन्होंने आगजनी और बैरिकेट्स खड़ा करने की कोशिश की। मेरिडा स्ट्रिट्स में झड़पें हुईं और शहर के बाकि हिस्से के प्रमुख चैराहे पर बड़ा संघर्ष हुआ।
विपक्ष प्रदर्शनकारियों ने सार्वजनिक सम्पत्ति और सरकारी भवनों और आर्थिक संस्थानों को अपना निशाना बनाया। उनकी हरकतों को दूर से देखने पर यह बात बिल्कुल साफ हो जाती है, कि वो वेनेजुएला के आर्थिक विकास, सामाजिक विकास योजनायें और राजनीति में आम जनता की हिस्सेदारी को बढ़ाने की कार्ययोजना को आर्थिक एवं राजनीतिक अस्थिरता से रोकना चाहते हैं। 2 फरवरी को सरकार विरोधी विपक्षी नेताओं ने ‘सड़कों पर उतरने‘ और ‘मदुरो सरकार को उखाड़ फेकने‘ की बातें की थी। उस समय उन्होंने संवैधानिक तरीके से वर्तमान सरकार को सत्ता से बेदखल करने की बातें की थी, किंतु उनका प्रदर्शन लगातार हिंसक होता चला गया। राजनीतिक अस्थिरता और राजनीतिक अराजकता के जरिये उन्होंने सरकार पर सत्ता छोड़ने का दबाव बनाना चाहा।

राष्ट्रपति निकोलस मदुरो ने देर रात गये चेतावनी जारी की, और बिना अनुमति होने वाले प्रदर्शनों पर रोक लगा दी। उन्होंने कहा- ‘‘प्रदर्शनकारी हिंसक तरीके से सरकार को सत्ता से बेदखल करना चाहते हैं। उन्हें इस काम के लिये प्रशिक्षित किया गया। वेनेजुएला में हम सभी से शांति बनाये रखने की मांग करते हैं। हिंसक तरीके से सत्ता पर अधिकार जमाना वेनेजुएला में संभव नहीं है। हम ऐसा नहीं होने देंगे।‘‘ उन्होंने हिंसक प्रदर्शनाकें पर रोक लगा दिया।

इक्वाडोर की सरकार ने भी वेनेजुएला की मदुरो सरकार के समर्थन में एक वक्तव्य जारी किया। वक्तव्य में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों द्वारा हिंसा फैलाने और सार्वजनिक सम्पत्ति को नुक्सान पहुंचाने की निंदा की गयी। इसे गैर जिम्मेदाराना हरकत करार दिया गया।

लोपेज ने 12 फरवरी को हिंसा के लिये मदुरो सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने सरकार, नेशनल गार्ड और पुलिस पर आरोप लगाया कि ‘‘वह हिंसा फैला रही है, ताकि प्रदर्शनों को कुचला जा सके।‘‘

अमेरिकी समर्थक पश्चिमी मीडिया ने लोपेज के वक्तव्य को प्रमुखता से प्रचारित किया। उन्होंने वेनेजुएला की चुनी हुई सरकार पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकों के दमन का आरोप लगाया। उन्होंने मिस्त्र, लीबिया और सीरिया में अपने ही द्वारा अंजाम दिये गये कारनामों को वेनेजुएला सरकार के द्वारा किये जा रहे दमन की तस्वीरों के रूप में पेश किया। सोशल मीडिया पर जिसकी तीखी प्रतिक्रिया हुई।

13 फरवरी को राष्ट्रपति मदुरो ने निजी मीडिया पर हिंसा को गलत नजरिये से पेश करने का आरोप लगाया। उन्होंने उन आरोपों को खारिज कर दिया कि सिक्यूरिटी फोर्स शांतिपूर्ण प्रदर्शनों का दमन कर रही है। उन्होंने कहा- ‘‘हम हो रहे प्रदर्शनों और अव्यवस्था फैला रहे प्रदर्शनकारियों के साथ, अब तक धैर्य से पेश आते रहे हैं। मगर अब, ऐसे हिंसक प्रदर्शनों और अराजकता पैदा करने वालों की अनदेखी नहीं की जा सकती। हम उन्हें इसकी इजाजत नहीं दे सकते कि वो हमारे देश को जला कर राख कर दे। हम उन्हें राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने और देश को तोड़ने की इजाजत नहीं दे सकते।‘‘ इंटीरियर मिनिस्टर ने जानकारी दी कि 12 फरवरी के हिंसक प्रदर्शनों में 3 लोगों की हत्या की गयी, 66 लोग घायल हुए हैं, और 70 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है।

12 फरवरी को मारे गये तीन लोगों में एक जुआन मोन्टोया -शाॅवेजवादी, दूसरा- बासिल दा कोस्टा-बढ़ई, और तीसरा एक पुलिस आॅफिसर है। मोन्टोया और डा कोस्टा को गोली मारी गयी। मदुरो ने कहा कि ‘‘ये हत्यायें 2002 में तख्तापलट के दौरान पेशेवर हत्यारों के द्वारा की गयी हत्याओं की तरह ही है।‘‘

आंतरिक मामलों के मंत्री रोडरिज ने बताया कि ‘‘12 फरवरी को हुए हिंसा की जांच ‘क्रिमनल इन्वेस्टीगेशन बाॅडी‘ के द्वारा शुरू हो गयी है। हिंसा के लिये जिम्मेदार लोगों का पता जल्द से जल्द चल जायेगा।‘‘ 13 फरवरी की दोपहर में रोडरिज ने इस बात की भी घोषणा की कि ‘‘यूनिवरसिटी के छात्रों को -समस्या के शांतिपूर्ण समाधान के लिये- काराकस में शाम 7 बजे आमंत्रित किया गया है।‘‘ उन्होंने उस दौरान कहा- ‘‘मैं यहां सुनने के लिये आया हूं। हम यूनिवरसिटी में शांति की योजनाओं पर बातें कर सकते हैं। शांति और सामाजिक जीवन के लिये एक अभियान को जारी रखने के बारे में बातें कर सकते हैं।‘‘

वेनेजुएला के मुख्य विपक्ष डेमोक्रेटिक यूनिटी -एमयूडी ने भी 12 फरवरी को हुई हिंसा की निंदा की। उसके सेक्रेटरी रेमोन एवेलेडो ने 13 फरवरी को कहा- ‘‘हम खुलेतौर पर हिंसा की निंदा करते हैं। हम शांतिप्रिय लोग हैं। हम ऐसे हिंसक प्रदर्शनों को खारिज करते हैं।‘‘

13 फरवरी को नेशनल असेम्बली के ‘कमेटी आॅन डोमेस्टिक पाॅलिसी‘ ने लीयोपोल्डो लोपेज, घोर दक्षिणपंथी, पापुलर विल के संस्थापक और असेम्बली मेम्बर मारिया मचाडो पर, जांच की मांग की।

सत्तारूढ़ यूनाईटेड सोसलिस्ट पार्टी के विधि निर्माता जोश मोरालिस ने भी कहा कि ‘‘हालांकि सरकार सभी वेनेजुएला वासियों की सुरक्षा के लिये आवश्यक कदम उठा रही है, मगर लोपेज और मचाडो अव्यवस्था और संकट को बनाये रखने की जो हरकतें कर रहे हैं, वह 2002 के तख्तापलट जैसी स्थितियों को बनाने के लिये लोगों को प्रेरित करने जैसा है।‘‘ उन्होंने आवश्यक तथा कारगर कदम उठाने की पेशकश की।

13 फरवरी को लीयोपोल्डो लोपेज के खिलाफ गिरफ्तारी वारण्ट जारी कर दिया गया।

शांति और स्थिरता की नयी पहल की गयी।

लोपेज और मचाडो ने विपक्ष के राष्ट्रपति पद के पूर्व उम्मीदवार हेनरिक कैप्रिलेस की मदुरो सरकार के साथ घरेलू सुरक्षा को बढ़ाने एवं सुनिश्चित करने के लिये बातचीत की निंदा की।

मचाडो 2002 में शाॅवेज के तख्तापलट के दौरान नेशनल असेम्बली को स्थगित करने और पेड्रो कारमोना को राष्ट्रप्रमुख घोषित करने वाले ‘कारमोना डिक्री‘ पर हस्ताक्षर करने वालों में थी। जिन्हे अमेरिकी सरकार का समर्थन हासिल था। पिछले साल जून में वेनेजुएला की सरकार ने एक आॅडियो रिकार्डिंग जारी की थी, जो कि उनकी सम्बद्धता एक अन्य तख्तापलट की योजना में होना प्रमाणित करता है। पिछले नवम्बर में उन पर दिसम्बर म्यूनस्पिल चुनाव के पहले वेनेजुएला को अस्थिर करने का आरोप भी लगा। 13 फरवरी को मचाडो ने विपक्ष समर्थकों से सड़कों पर बने रहने की अपील की। उन्होंने 12 फरवरी की हिंसा के लिये सरकार को दोषी ठहराया। उन्होंने अपने ट्विटर एकाउण्ट पर लिखा कि ‘‘शांतिपूर्ण प्रदर्शन हमारा अधिकार है, और इससे सरकार डरी हुई है। इसलिये उन्होंने हम पर कल हमला किया। मगर हम सड़कों पर बने रहेंगे।‘‘

A-flaming-barricade-erect-01113 फरवरी को भी वेनेजुएला के कई क्षेत्रों में हिंसा जारी रही। देश के सभी विश्वविद्यालय बंद रहे।

शाॅविस्टा ने भी वेनेजुएल के कई शहरों में सड़कों पर अपनी उपस्थिति को सरकार के पक्ष में बनाये रखा। संयुक्त समाजवादी पार्टी के ‘यूथ विंग‘ के एक आर्गनाइजर सन्नी सांचेज़ ने स्टेट न्यूज एजेन्सी एवीएन से कहा- ‘‘यूथ आर्गनाइजेशन मदुरो सरकार के प्रति अपनी एकजुटता प्रदर्शित करने के लिये -फाॅसिस्ट, नाजी और आतंकियों के खिलाफ, जिन्हें देश में अव्यवस्थ पैदा करने के लिये प्रशिक्षित किया गया है- सड़कों पर बने रहेंगे।‘‘

सड़कों पर अपनी पकड़ बनाये रखने और वेनेजुएला को सहसा ही रोक लेने की विपक्ष की नीतियां, पूरी तरह सफल नहीं हो सकीं। उन्हें सिर्फ सरकार ही नहीं, जनप्रतिरोध का भी सामना करना पड़ा।

मदुरो ने कहा- ‘‘विपक्ष के चर्चित चेहरों के साथ-साथ कोलम्बिया में वेनेजुएला के पूर्व राजदूत फर्नाण्डो जीरबासी और प्रेज काल के मिलिट्री चीफ मारियो इवान करातू को हिंसा में शामिल होने के लिये गिरफ्तार किया जायेगा।‘‘ जिनकी सम्बद्धता इन हिंसक प्रदर्शनों एवं वारदातों में पक्के तौर पर है।

वामपंथी पड़ोसी देश -क्यूबा, इक्वाडोर, बोलेविया और अर्जेन्टीना ने वेनेजुएला में जारी हिंसा की कड़े शब्दों में आलोचना की।

इक्वाडोर के विदेश मंत्रालय के तरफ से जारी वक्तव्य में कहा गया कि ‘‘इक्वाडोर की सरकार वेनेजुएला में विपक्ष द्वारा प्रायोजित हिंसा के खिलाफ राष्ट्रपति निकोलस मदुरो को अपना पूर्ण समर्थन देती है।‘‘

बोलेविया के विदेश मंत्री डेविड चोको चुनाका ने वेनेजुएला में अस्थिरता पैदा करने के किसी भी कार्यवाही को पूरी तरह खारिज किया। उन्होंने वेनेजुएला सरकार को अपना अटूट समर्थन किया।

समाजवादी देशों की एकजुटता ने ही महाद्वीपीय एकजुटता को नयी दिशा दी है। जो महाद्वीप की प्रतिक्रियावादी ताकतों और अमेरिकी सरकार एवं लातिनी अमेरिका में उसके समर्थक देशों की सबसे बड़ी समस्या है। स्थितियां ऐसी बन गयी हैं, कि सरकार चाहे जिसकी हो, उस देश की आम जनता, जनता के पक्ष में खड़ी सरकारों के साथ होती है। समाजवादी देशों ने जन एकजुटता की नयी समझा को विकसित किया है। जिसका दबाव उन देशों की सरकार पर, उनकी जनविरोधी अमेरिकी समर्थक नीतियों पर लगातार बढ़ता जा रहा है।

13 फरवरी की रात मदुरो ने बताया कि ‘‘विपक्षी प्रदर्शनकारी बासिल द कोस्टा और सरकार समर्थक युआन मोन्टोया की हत्या एक ही हथियार (बंदूक) से की गयी है।‘‘

अनुमान लगाया जा सकता है, कि पेशेवर हत्यारा, शाॅर्पशूटर या तो एक है, या उसे निर्देशित करने वाला व्यक्ति, उसके पीछे खड़ी ताकत एक है। जिसका मकसद तनाव को बढ़ाना और हिंसक प्रदर्शन को वेनेजुएला की सरकार के लिये घातक बनाना है। ऐसी स्थितियां बनाना है, कि राजनीतिक अस्थिरता सुनिश्चित हो जाये, और मीडिया वार के जरिये सरकार को अलोकतांत्रिक प्रमाणित कर अमेरिकी लोकतंत्र के लिये राजनीतिक हस्तक्षेप संभव हो सके।

14 फरवरी को लोपेज ने ‘ट्विटर‘ पर कहा कि ‘‘वो अभी भी देश में ही है।‘‘ और उन्होंने अपने खिलाफ लगाये गये सभी आरोपों को खारिज कर दिया। हालांकि नेशनल असेम्बली के प्रेसिडेण्ट कैबेलो ने 14 जनवरी को जानकारी दी थी कि लोपेज ने 15 फरवरी -शनिवार- सुबह 6 बजे, कोलम्बिया -बगोटा- के लिये एक फ्लाईट बुक की है। उन्होंने कहा- ‘‘यह संदेहास्पद है, कि उन्हें यहां से फरार होने दिया जायेगा।‘‘ उन्होंने कहा- ‘‘तुम यहां से फरार नहीं हो सकते हो कायर।‘‘
अपने को विपक्ष के उदारवादी नेता प्रमाणित करने वाले हैनरिक कैप्रिलेस ने विपक्ष के घोर प्रतिक्रियावादी लोपेज जैसे लोगों से दूरियां बना ली है। 13 फरवरी को उन्होंने अपने प्रेस कांफ्रेन्स में अनुदारवादी विपक्ष के नेताओं की निंदा की, जिन्होंने निकोलस मदुरो सरकार को सत्ता से बेदखल करने के लिये चलाये जा रहे अभियान में, उनके शामिल न होने के लिये उन्हें ‘गद्दार‘ करार दिया था। मगर 14 फरवरी को उन्होंने डेमोक्रेटिक गठबंधन की ओर से आरोप लगाया कि ‘‘समस्या शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे छात्र नहीं हैं, बल्कि समस्या की वजह सरकार और उनकी पार्लियामेण्ट्री ग्रूप है।‘‘ उन्होंने मांग की कि सरकार गिरफ्तार किये गये छात्रों को रिहा करे, जिन्हें प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किया गया है, और कथित रूप से सरकार समर्थित पारमिलिट्री ग्रूप को निःशस्त्र करे।

15 फरवरी को राष्ट्रपति निकोलस मदुरो ने एक ‘जन रैली‘ का आव्हान किया। काराकस में हुई इस रैली में हजारों-हजार सरकार समर्थकों ने हिस्सा लिया। राष्ट्रपति ने सरकार समर्थकों को सम्बोधित करते हुए कहा, कि ‘‘वो वेनेजुएला में शांति की स्थापना के लिये संघर्ष करें। राजनीतिक मतभेदों को विचारों के संघर्ष से हल किया जा सकता है, ना कि हथियारों के जरिये।‘‘

उन्होंने कहा- ‘‘मैं सभी वेनेजुएलावासियों से अपील करता हूं, कि वो सड़कों पर अपनी वैचारिक प्रतिबद्धता के साथ, लोगों के अधिकारों का सम्मान करते हुए, बिना हिंसा के संघर्ष करें। हथियारों के खिलाफ सिर्फ विचारों से ही लड़ा जा सकता है।‘‘

उन्होंने शाॅवेजवाद के अंदर किसी भी अतिवादी ग्रूप को अस्वीकार करते हुए उन्हें चेतावनी दी कि ‘‘हम किसी भी किस्म के हिंसा को स्वीकार नहीं करेंगे।‘‘ मदुरो ने कहा- ‘‘मैं स्पष्ट रूप से यह कहना चाहता हूं, कि कोई भी लाल शर्ट पहने, जिसमें शाॅवेज का चेहरा है, और हमला करने के लिये यदि हथियार निकालता है, तो वह शाॅविस्टा या क्रांतिकारी नहीं है। मैं शाॅवेजवाद और बोलिवर क्रांति के अंदर हिंसक ग्रूप को स्वीकार नहीं कर सकता।‘‘ …..‘‘यदि आप लड़ने के लिये अपने पास हथियार रखना चाहते हैं, तो मैं आपसे कहुंगा आप शाॅवेजवाद से बाहर जाईये।‘‘ उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, कि ‘‘वेनेजुएला में सिक्यूरिटी फोर्स ही वह एकमात्र संगठन होना चाहिये, जिसके पास हंथियार हों।‘‘ उन्होंने ‘12 फरवरी के हिंसा के जिम्मेदार लोगों को सजा मिलेगी‘ का आश्वासन दिया।

प्रतिक्रियावादी ताकतें उदार और अनुदार, कैप्रिलेस और लोपेज के चेहरों में भले ही ऊपर से अलग-अलग लड़ाईयां लड़ते हुए नजर आते हैं, मगर उनकी सोच आपस में जुड़ी हुई रही है। लोपेज ने यदि हिंसक प्रदर्शनों को बढ़ावा दिया, तो कैप्रिलेस ने उसकी आलोचना करते हुए हिंसा के लिये सरकार को ही जिम्मेदार ठहराया। कैप्रिलेस ने 16 फरवरी को अपने समर्थकों को पारामिलिट्री को हथियार विहीन करने की मांग और हिंसा के खिलाफ एक ‘राष्ट्रीय मार्च‘ निकालने की घोषणा की। उन्होंने यह प्रमाणित करने की कोशिश की कि वेनेजुएला में हो रहे हिंसक प्रदर्शनों के लिये मदुरो सरकार जिम्मेदार है, जो शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों का दमन करने के लिये हिंसा का सहारा ले रही है।

16 फरवरी की रात को राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय प्रसारण में देश को जानकारियां दी कि 3 अमेरिकी अधिकारियों को वेनेजुएला के अमेरिकी दूतावास से, निष्कासित किया जा चुका है। उन्हें 48 घण्टे का समय दिया गया है।‘‘ उन्होंने देशवासियों को बताया कि अमेरिकी दूतावास के इन अधिकारियों ने वेनेजुएला के निजी विश्वविद्यालयों में बैठकें की थी, अमेरिका में जा कर पढ़ाई करने के लिये वीजा देने की कहानी के साथ।‘‘ उन्होंने बताया कि इन अधिकारियों ने ऐसी ही आश्चर्यजनक बैठकें की थी। जिसका अघोषित मकसद छात्रों को सरकार के विरूद्ध हो रहे प्रदर्शनों में प्रलोभन दिखा कर शामिल करना था।

उन्होंने अमेरिकी सरकार को बड़े ही मुलायम शब्दों में सख्त संदेश किया कि ‘‘हमारा सम्मान किया जाना चाहिये।‘‘ …..उन्होंने देशवासियों से कहा कि ‘‘हमने उनसे कह दिया है, कि आप वाशिंगटन जाईये, और वहीं जाकर षडयंत्र कीजिये। वेनेजुएला को अकेला छोड़ दीजिये।‘‘

henrique-capriles-radonski63517 फरवरी को अमेरिकी सरकार ने अपने ऊपर लगे अरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ‘‘यह आरोप कि संयुक्त राज्य वेनेजुएला में हो रहे प्रदर्शनों को संगठित करने में सहयोग दे रहा है, आधारहीन और गलत है। …..हम यह मानते हैं, कि वेनेजुएला के भविष्य का निर्णय वेनेजुएला के लोग ही करेंगे।‘‘

अमेरिकी सरकार की इस शराफत पर यकीन अब आम अमेरिकी तक नहीं करता। विश्व समुदाय और विश्व जनमत ने धोखा खाना छोड़ दिया है। इराक में धोखा देना असान हुआ था। अफगानिस्तान के बाद लीबिया में भी धोखा दिया जा सका, मगर सीरिया में यह संभव नहीं हो सका। जिसे बराक ओबामा अब तक भूल नहीं पाये हैं। वेनेजुएला और यूक्रेन का सबक वो कैसे बर्दाश्त करेंगे, देखना यही है। 15 फरवरी के अमेरिकी विदेशमंत्री जाॅन कैरी ने वेनेजुएला की सरकार द्वारा देश में चल रहे प्रदर्शनों के दौरान की गये गिरफ्तारियों और विपक्ष के नेता लीयोपोल्डो लोपेज के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारण्ट की निंदा की। उन्होंने इस कदम को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ उठाया गया ‘डरावना कदम‘ करार दिया।

अमेरिकी विदेशमंत्री के पास वेनेजुएला के अलावा और भी कई ‘डरावने‘ मुद्दे हैं। वो एशिया में चीन को डराने-धमकाने और अमेरिकी वर्चस्व को बचाने में लगे हैं। यूक्रेन दुःस्वप्न बन गया है, क्रीमिया में उन्हें रूस से गहरी मात मिली है। यही कारण है कि उन्हें सारी दुनिया की निगरानी के लिये चलाये जा रहे नेशनल सिक्यूरिटी एजेन्सी के सर्विलांस प्रोग्राम का डरावनापन नजर नहीं आ रहा है। उन्हें दुनिया को एक बड़े युद्ध के मुहाने पर खड़ा करने में भी डर नहीं लग रहा है। उनकी चिंता में वेेनेजुएला, अमेरिकी समर्थित आतंकी गुटों से भी ज्यादा डरावना नजर आ रहा है, क्योंकि यह महाद्वीपीय एकजुटता की पहचान बन गया है। और अमेरिकी सरकार को अपनी पहचान के अलावा किसी और की पहचान डरावनी लगती है। अमेरिकी सरकार अपनी सूरत दशकों से आईने में नहीं देखी है।
वेनेजुएला के राष्ट्रपति मदुरो ने बताया कि ‘‘अमेरिका के पश्चिमी गोलार्द्ध सम्बंधों के उपसचिव एलेक्स ली ने ‘आॅर्गनाईजेशन आॅफ अमेरिका‘ में वेनेजुएला के राजदूत राॅय शाॅडेटन को मांगों की एक सूची सौंपी है, कि मौजूदा हालात में वेनेजुएला की सरकार को क्या करना चाहिये?‘‘ उन्होंने बताया कि ‘‘हमें निर्देश दिया है, कि हाल के प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिये गये, सभी प्रदर्शनकारियों को रिहा कर दिया जाये। लीओपोल्डो लोपेज के खिलाफ लगाये गये, सभी आरोपों को स्थगित कर दिया जाये, और विपक्ष के साथ बातचीत की जाये।‘‘ राष्ट्रपति ने कहा- ‘‘अमेरिका से हम सिर्फ इतना कहना चाहते हैं, कि उनकी मांगें असभ्य हैं, और अस्वीकार हैं। हम किसी दबाव और धमकी को स्वीकार नहीं कर सकते।‘‘ उन्होंने कहा- ‘‘अमेरिकी सरकार के लिये मानवाधिकार का मतलब दक्षिणपंथी-प्रतिक्रियावादी ताकतों के अधिकार के लिये देश की चुनी हुई सरकार को उखाड़ फेकना है। उनके लिये संवैधानिक सरकार का तख्तापलट करना है। और हम समझते हैं कि हमें ऐसे मानवाधिकार की जरूरत नहीं है। अमेरिकी सरकार और उसके सहयोगियों की जरूरत नहीं है।‘‘

पेशे से पत्रकार और अधिवक्ता ईवा गोलिंजर के द्वारा किये गये जांच के अनुसार -अमेरिका ने बोलिवेरियन एरा के दौरान विपक्ष को कूटनीतिक समर्थन और आर्थिक सहयोग दिया है।‘‘ उन्होंने अपने ट्वीटर एकाउण्ट पर अमेरिकी सरकार के दस्तावेजों के हवाले से 16 फरवरी को ट्वीट किया कि ‘‘साल 2014 के अमेरिक बजट में 5 मिलियन डाॅलर वेनेजुएला के विपक्षी गुटों को देने के लिये है। इसके अलावा गुप्त रूप से दिया जाने वाला बजट अलग है।‘‘ जो निश्चय ही घोषित बजट से बहुत ज्यादा है। जिसका उपयोग इस क्षेत्र में राजनीतिक अस्थिरता फैलाने के लिये किया जाता रहा है।

अमेरिकी सरकार आज भी यही कर रही है। मगर लातिनी अमेरिकी देशों का परिदृश्य बदल गया है। अमेरिकी नीतियों में बस इतना परिवर्तन आया है कि सैनिक तख्तापलट से ज्यादा, अब वैधानिक तख्तापलट को वरियता दे रही है। जिसमें राजनीतिक अस्थिरता और अराजकता पैदा करने के लिये पेशेवर राजनीतिक और पेशेवर आतंकियों की जरूरतें बढ़ गयी हैं। वाशिंगटन के षड़यंत्रकारी दिन-रात यही करते रहे हैं। 15 फरवरी को जारी गिरफ्तारी वारंट और नेशनल असेम्बली के प्रेसिडेण्ट की घोषणा के बाद, 17 फरवरी को लोपेज ने घोषणां की कि ‘‘वह 18 फरवरी को विरोध प्रदर्शन में शामिल होगा, उसका नेतृत्व करेगा।‘‘

लोपेज की घोर दक्षिणपंथी राजनीतिक दल -पापुलर विल- ने अन्य विरोधी गुटों से अपील की, कि वो 18 फरवरी की रैली में भाग लें। उन्होंने कैथलिक चर्च, विदेशी राजनयिक, और विश्व समुदाय को भी आमंत्रित किया।

18 फरवरी को आयोजित रैली में लोपेज ने भाग लिया और खुद को नेशनल गार्ड को सौंप दिया।

उन्होंने घोषणा की कि ‘‘मैं खुद को भ्रष्ट एवं अन्यायपूर्ण व्यवस्था को सौंप रहा हूं।‘‘ मगर यही ‘सौंपना‘ उनके अब तक जीवित होने की वजह हे। जिन ताकतों ने उन्हें आगे बढ़ाया, उनकी योजना आंदोलन को विस्फोटक बनाने के लिये कुछ और थी।

वेनेजुएला की अदालत ने लोपेज पर लोगों का उकसाने, सार्वजनिक अशांति पैदा करने, राष्ट्रीय सम्पत्ति को नुक्सान पहुंचाने और इरादतन हत्या का आरोप लगाया है।

लोपेज ने ह्यूगो शाॅवेज के खिलाफ 2002 में हुए असफल तख्तापलट में भी हिस्सा लिया था। उन्होंने उस समय के आंतरिक मामलों के मंत्री रामोन रोडरिज को अपने कब्जे में कर लिया था। 2011 में लोपेज के चुनाव लड़ने पर रोक लगा दिया गया। उन पर यह आरोप प्रमाणित हो गया है, कि 2000 से 2008 के बची अपने मेयर होने के दौरान उन्होंने सार्वजनिक संसाधनों का गलत उपयोग किया है।

राष्ट्रपति निकोलस मदुरो ने बताया कि ‘‘लोपेज को काराकस के बाहर एक जेल में रखा गया है।‘‘ उन्होंने उस योजना को सार्वजनिक किया जिसके अंतर्गत लोपेज की हत्या तय थी। उन्होंने कहा- ‘‘लोपेज के माता-पिता -भले ही वो हमारे विरूद्ध हैं- इस बात को जानते हैं कि हमने उनके बेटे की जान बचाई है।‘‘ उन्होंने बतया कि विपक्ष के अंदर के लोग अपने आंदोलन को बढ़ाने, उसे और विस्फोटक बनाने के लिये लोपेज की हत्या की योजना बना रहे थे।‘‘ उन्होंने जानकारी दी कि नेशनल असेम्बली के प्रेसिडेण्ट डिओसडाडो कैबेलो ने खुद लोपेज को उनकी सुरक्षा के लिये सावधान रहने में सहयोग दिया।‘‘ माना यही जा रहा है, कि कोलम्बिया भागने के बजाये अपनी जान बचाने के लिये ही लोपेज ने आत्मसमर्पण किया है।

18 तारीख को विपक्ष का प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा।

maduro_venezuela_8296218 फरवरी को ही काराकस में स्टेट आॅयल कम्पनी के कामगरों ने ‘शांति जुलूस‘ निकाला और राष्ट्रपति भवन तक मार्च किया, जहां पहले से ही हजारों सरकार समर्थक मौजूद थे। यूनियन के प्रेसिडेण्ट विल्स रेंवाल ने कहा- ‘‘हम पेट्रोलियम वर्कर्स उस राष्ट्रपति को स्वीकार नहीं करेंगे, जिसे वेनेजुएला की आम जनता ने नहीं चुना है।‘‘ उन्होंने तख्तापलट जैसी किसी भी कार्यवाही के खिलाफ कामगरों की एकजुटता व्यक्त करते हुए कहा कि ‘‘हम काॅमरेड निकोलस मदुरो के साथ हैं। हमें तख्तापलट जैसी किसी भी कार्यवाही के खिलाफ कदम उठाने का अधिकार है।‘‘

सरकार समर्थकों के विशाल जनसभा को सम्बोधित करते हुए राष्ट्रपति मदुरो ने कहा कि ‘‘किसी भी देश को किसी दूसरे देश पर मनोवैज्ञानिक युद्ध और हिंसा को थोपने, उसे अपने अधीन करने का अधिकार नहीं है।‘‘ उन्होंने सार्वजनिक रूप से वार्ता का प्रस्ताव रखते हुए कहा कि यदि वो हमसे बातचीत करना चाहते हैं, तो यहां, आम जनता के बीच उन्हें आना होगा। देश की जनता के सामने उन्हें चर्चा करनी होगी। हम अभिजात्य वर्ग से, बंद कमरों में वार्ता नहीं चाहते।‘‘

उन्होंने ने वेनेजुएला की आम जनता से तख्तापलट होने की स्थिति में उठ खड़े होने की अपील की। उन्होंने कहा- ‘‘यदि बुर्जुआ वर्ग तख्तापलट के जरिये राजसत्ता पर कब्जा कर लेता है, तो आम जनता को देश के कोने-कोने से, उठ खड़ा होना होगा।‘‘ उन्होंने 2002 के तख्तापलट को भी याद किया जब आम जनता, सेना और नेशनल गार्ड प्रतिरोध में एकजुट हो कर उठ खड़ी हुई थी। जिनके जबर्दस्त विरोध की वजह से अमेरिकी समर्थक प्रतिक्रियावादी ताकतें 48 घण्टे भी सत्ता संभाल नहीं सके। 18 फरवरी को देश भर में शांति रैली का आयोजन किया गया।

सेना ने भी देश की आम जनता और राष्ट्रपति निकोलस मदुरो और उनकी सरकार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जाहीर की।

18 फरवरी को डिफेन्स मिनिस्टर कारमेन मीलिनडीज ने एक वक्तव्य जारी किया। उन्होंने कहा ‘‘वो और बोलिवेरियन नेशनल आमर्ड फोर्स वेनेजुएला के संविधान का कठोरता से पालन करते हैं। हम दक्षिणपंथी विपक्ष के हिंसक प्रदर्शनों की निंदा करते हैं।‘‘ उन्होंने दक्षिणपंथी विपक्ष की कार्यवाहियों के बारे में कहा कि ‘‘वो तख्तापलट को प्रोत्साहित कर रहे हैं।‘‘ उन्होंने कहा- ‘‘विदेशी सरकारों के सहयोग से किये जा रहे प्रदर्शनों का मतलब कानून का उल्लंघन और देश को तोड़ना है।‘‘ उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘‘आमर्ड फोर्स वेनेजुएला के राष्ट्रपति के साथ है, और उनका सम्मान करती है।‘‘ उन्होंने 2002 की स्थितियों को खारिज कर दिया और कहा- ‘‘हम किसी भी सरकार को तब तक स्वीकार नहीं करेंगे, जब तक वो संवैधानिकी तरीके से सत्ता में नहीं आती है।‘‘

19 फरवरी को भी हिंसक वारदातें हुईं। अधिकृत रूप से मौजूदा विरोध प्रदर्शनों में अब तक 10 लोग मारे गये हैं। जिनमें से 5 मौतें उन बेरिकेट्स की वजह से हुई हैं, जिन्हें विपक्ष ने वेनेजुएला के जन-जीवन को रोकने के लिये खड़ा किया।

19 फरवरी को ही बोलिवर स्टेट के हजारों औद्योगिक मजदूरों ने सरकार के पक्ष में प्रदर्शन किये।

सरकार की नीतियों के पक्ष में वेनेजुएला की आम जनता, कामगर वर्ग विपक्ष के खिलाफ सड़कों पर रही । दक्षिणपंथी ताकतों और उनके विदेशी समर्थकों ने जितना सोचा नहीं था, उससे कहीं बड़े जनप्रतिरोध का उन्हें सामना करना पड़ा। छात्रों के एक छोटे समूह ने भले ही प्रतिक्रियावादी ताकतों के पक्ष में हिंसक वारदातें कीं, मगर छात्र एवं युवा संगठन सरकार के पक्ष में सड़कों पर रहे हैं। सरकार कभी भी, किसी भी परिस्थिति में अकेली नहीं पड़ी। यह शाॅवेज के साथ मदुरो को मिला जन समर्थन है। यही नहीं, देश के प्रतिक्रियावादी ताकतों और अमेरिकी सरकार को भी लातिनी अमेरिकी देशों का खुला समर्थन नहीं मिला।
वेनेजुएला की वर्तमान स्थिति पर कोलम्बिया के अनुदारवादी, अमेरिकी समर्थक राष्ट्रपति जुआन सेंटोस ने पहली बार अपनी प्रतिक्रिया जारी की कि ‘‘वेनेजुएला की सरकार और विपक्ष वार्ता करें।‘‘ उन्होंने कहा कि ‘‘सभी को बिना हिंसा के विरोध प्रदर्शन का अधिकार है।‘‘ उन्होंने वेनेजुएला में रह रहे कोलम्बिया के लोगों को ‘बिना किसी कारण‘ हटाये जाने की बातें भी की। जिस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए वेनेजुएला के राष्ट्रपति मदुरो ने कहा कि ‘‘बस! अब बहुत हुआ।‘‘ उन्होंने कोलम्बिया के राष्ट्रपति से सवाल किया- ‘‘यदि एक विरोधी गुट आपको आपकी जगह से हटाने की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे तो आप क्या करेंगे?‘‘ दोनों देशों की सीमा से लगे क्षेत्र और प्रांत की राजधानी सन-क्रिस्टोबल की स्थिति गंभीर रही है।

22 फरवरी को वेनेजुएला की सरकार ने कोलम्बिया की सीमा से लगे टचिरा राज्य की स्थितियों को संभालने और उसे नियंत्रित करने के लिये सेना की 2 बटालियन भेजने का निर्णय लिया है। स्थितियां अभी भी विस्फोटक बनी हुई हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार -टचिरा राज्य की राजधानी सन-क्रिस्टोबल हाल के हिंसा के दौरान, विपक्षी प्रदर्शनकारियों द्वारा सड़कों पर बनाये गये बेरिकेट्स की वजह से लगभग थम सा गया है। परिवहन लगभग थम सा गया है। ज्यादातर दुकानें और व्यावसायिक इकाईयां बंद पड़ी हैं। स्थानीय प्रशासन ने चेतावनी दी है, कि बैरिकेट्स (नाकेबंदी) की वजह से खाद्य सामग्री और घरेलू गैसों की आपूर्ति बाधित हो रही है। परिवहन मजदूर संकटग्रस्त हैं।‘‘

काराकस सरकार का अनुमान है, कि ऐसी स्थितियों के लिये वहां की अर्धसैनिक बल और अपराधिक हथियारबद्ध लोगों का गुट जिम्मेदार है, जिन्हें वहां के स्थानीय विपक्षी मयेर डेनियल सीवालोस का समर्थन एवं सहयोग मिल रहा है।

19 फरवरी को वेनेजुएला के विदेश मंत्री इलियास जोआ ने लातिनी अमेरिकन एवं कैरेबियन देशों के संगठन -सीईएलएसी- के राजदूत से टचिरा का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ‘‘वहां की स्थिति काफी संकटपूर्ण है। हम संयम और शांति के साथ काम कर रहे हैं, ताकि हम समझ सकें कि वेनेजुएला में क्या चल रहा है।‘‘ उन्होंने कहा- ‘‘हाल के हफ्तों में हुए विपक्ष के विरोध प्रदर्शन और सड़कों पर बनाये गये बेरिकेट्स ने देश को प्रभावित किया है।‘‘

20 फरवरी को घरेलू मामलों के मंत्री मिगुएल राॅड्रिगेज ने घोषणा की कि टचिरा स्टेट में व्यवस्था स्थापित करने के लिये सेना की दो बटालियनें वहां भेजी जा रही हैं। जो स्थानीय सरकार को सहयोग देंगी। पहली बटालियन को मुख्य शहर के हाईवे में तैनात किया जायेगा, मगर वह शहर में दाखिल नहीं होगी।‘‘ उन्होंने प्रेस से कहा कि ‘‘सेना वहां मौजूद यूनिट को मजबूत करेगी, क्योंकि हमने पाया है कि वहां हो रहे दंगों में अर्धसैनिक बल के रूप में कोलम्बिया से आये हथियारबद्ध लोगों की सम्बद्धता है।‘‘

उन्होंने जानकारी दी कि नेशनल बोलिवेरियन गार्डस् शहर और आस-पास के म्युनिस्पल क्षेत्रों को व्यवस्थित करेंगे।

दूसरा बटालियन -जोकि आर्मी इंजीनियरों का है- शहर में प्रवेश करेगा, और वहां जलाये गये टायर, कचड़ा और लगाये गये बेरिकेट्स को हटाने का काम करेगा, जिसे विपक्षी प्रदर्शनकारियों ने खड़ा किया है। पूरे राज्य में हथियारों को लेकर घूमने पर रोक लगा दी गयी है।

राॅड्रिगेज ने बताया कि इस बात के पर्याप्त सबूत हैं, कि सन-क्रिस्टोबल के मेयर डेनियल सीबालेस ने पारामिलिट्री और हथियारबद्ध अपराधियों को आर्थिक सहयोग दिये हैं। जिन्होंने वहां अव्यवस्था फैलाने के लिये भुगतान लिया।

जिन पेशेवर हत्यारों, आतंकियों और विद्रोहियों को लीबिया और सीरिया में खड़ा किया गया, वेनेजुएला में भी वैसे ही पेशेवर विद्रोही और आतंकियों को खड़ा किया जा रहा है। और यह जगजाहिर है, कि ऐसे आतंकी और विद्रोही अमेरिकी सहयोग से ही चलते हैं।

राष्ट्रपति मदुरो ने 20 फरवरी को कहा कि ‘‘इस बात की जांच की जायेगी और यदि मेयर दोषी हैं, तो उन्हें जेल भेजा जायेगा, वो जेल जायेंगे।‘‘ सरकारी अधिकारियों ने दावा किया है, कि ‘‘टचिरा की सीमा से लगे मीरिडा स्टेट में भी पारामिलिट्री मौजूद है।‘‘ 21 फरवरी को मीरिडा स्टेट की सरकार ने जानकारी दी कि उन्होंने 3 हथियारबद्ध लोगों को हिरासत में लिया है, जिन पर पारामिलिट्री होने का शक है।‘‘ 19 फरवरी को मीरिडा में एक सेफ हाउस में एक इस्त्राइली मशीनगन मिला है। मीरिडा के समाजवादी गर्वनर एलेक्सिस रमिरीज ने बताया कि अब तक के जांच के अनुसार इस हथियार का उपयोग सिक्यूरिटी फोर्स और विरोधी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा भड़काने के उद्देश्य से किया गया है।‘‘ स्टेट गर्वनर ने जानकारी दी कि ‘‘कट्टर विपक्षी शहर के मुख्य एवेन्यू पर बेरिकेट्स लगा कर वहां से गुजरने वालों से टोल टैक्स वसूल रहे हैं।‘‘

प्रदर्शन और हिंसा के दौरान जलाये गये 40 नये मेट्रो बस और खाद्य पदार्थों की ढुलाई करने वाले ट्रकों को जलाने की निंदा राष्ट्रपति मदुरो ने की है। उन्होंने बोलिवर स्टेट के विसेण्टनारियो बाजार में आग लगाने की भी निंदा की।

राष्ट्रपति ने अपने समर्थकों से कहा है, कि ‘‘किन्हीं परिस्थितियों में यदि विपक्षी फाॅसिस्ट सत्ता पर अधिकार कर लेते हैं, तो मैं आपको यह अधिकार देता हूं कि अपने देश की रक्षा के लिये सड़कों पर उतर आयें।‘‘

उग्रदक्षिणपंथी लोपेज की गिरफ्तारी के बाद उदारवादी दक्षिणपंथियों ने प्रदर्शनों का मोर्चा संभाल लिया है। 22 फरवरी को काराकस में आयोजित विपक्षी गुटों के मार्च में हेनरिक कैप्रिलेस ने सरकार के सामने अपनी मांगों की फेहरिश्त पेश की। जिसमें हाल के प्रदर्शनों के दौरान हिंसा के लिये गिरफ्तार किये गये छात्र एवं युवाओं की रिहाई के साथ लोपेज की रिहाई की मांग की गयी है। 2002 के तख्तापलट के दौरान एक पुलिस अधिकारी इवान सिमोनओवियस, जिस पर हत्या का आरोप है, की रिहाई की मांग की गयी है। सरकारी दमन एवं उत्पीड़न बंद करने और पारामिलिट्री को समाप्त करने की भी पेशकश की गयी है।

कैप्रिलेस और विपक्ष की मांगों का साथ उनकी अपनी हरकतें भी नहीं दे पा रही हैं।

प्राईवेट वेनेजुएलियन फर्म -इंटरनेशनल कासटिंग सर्विस- द्वारा कराये गये सर्वेक्षण के अनुसार 81.1 प्रतिशत लोगों का मानना है कि विपक्ष का प्रदर्शन हिंसक है।

a2-DLN8439624 फरवरी की रात नेशनल असेम्बली के प्रेसिडेण्ट डिओसडाडो कैबेलो ने वेनेजुएला में हो रहे हिंसक प्रदर्शनों में अमेरिकी सम्बद्धता के अकाट्य प्रमाण पेश किये। राष्ट्रपति मदुरो की हत्या करने की साजिशों का भी खुलासा किया।

विपक्षी पिएद्रा पार्टी के राजनीतिक सलाहकार जुआन जोस रेन्डोन और रिकार्डो कोसलिंग के कई ई-मेल का खुलासा किया। रेन्डोन ने कोसलिंग को कोलम्बिया के पूर्व राष्ट्रपति उरिबे की भूमिका के बारे में लिखा है, कि उरिबे ‘संसाधन‘ और ‘सह-सम्पर्क‘ की जानकारियों उपलब्ध करा रहे हैं। उरिबे का मकसद इस क्षेत्र के इस कैंसर (वेनेजुएला की समाजवादी सरकार) को खत्म करना है।

ह्यूगो शाॅवेज और कोलम्बिया के पूर्व राष्ट्रपति उरिबे के बीच के संबंध हमेशा तनावपूर्ण रहे हैं। कोलम्बिया किसी भी कीमत पर वेनेजुएला की समाजवादी सरकार और शाॅवेज को खत्म करना चाहता रहा हैं। जोकि अमेरिकी समर्थक देश है। और जिसे अमेरिकी सरकार का पूर्ण समर्थन प्राप्त है।

कैबेलो ने दक्षिणपंथी लेजिस्लेटर मारिया कोरिना मचाडो द्वारा 20 फरवरी को लाॅयर गुस्तावो तार को लिखे ई-मेल को पढ़ा, जिसमें मचाडो ने लिखा था- ‘‘हम टचिरा -जहां कई हिंसक बेरिकेट्स बनाये गये- को उदाहरण के रूप में पेश करते हुए, उसे जारी रखना चाहते हैं, मगर हमें एक मिनट के लिये भी सड़कों पर बने रहने और शाांति की हमारी मांगों को भूलना नहीं है, यह हमारे दोस्तों …..जोकि डिपार्टमेंट -अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेण्ट- में हैं, कि सलाह है।‘‘

कैबेलो ने यह भी कहा कि ‘‘ऐलेजैंड्रो माक्र्वेज़ -जिसकी मौत 23 फरवरी को हुई, को दक्षिणपंथियों ने मारा है।‘‘

कैबेलो ने पब्लिक टेलीविजन पर कहा, कि माक्र्वेज़ को मार दिया गया, क्योंकि उसने अपना मिशन पूरा नहीं किया, जिसके लिये उसे पैसे दिये गये थे।‘‘ कैबेलो के अनुसार माक्र्वेज़ को पारामिलिट्री ट्रेनिंग दी गयी है, और उन्होंने माक्र्वेज़ की फोटो भी दिखाई, जिसमें वह स्नाइपर्स का उपयोग कर रहा था, जिस वक्त वह अमेरिका में प्रशिक्षण ले रहा था।

कैबेलो ने माक्र्वेज़ द्वारा किये गये ट्विट्स को मीडिया के सामने पेश किया जिसमें उसने राष्ट्रपति निकोलस मदुरो की हत्या पर चर्चायें की थी।

24 फरवरी की दोपहर में मदुरो ने एक बड़े मोटरबाइक रैली -शांति के लिये यात्रा- को सम्बोधित करते हुए कहा कि ‘‘अरागुआ में, वहां के अधिकारियों ने एक भाड़े के सैनिक को अपनी गिरफ्त में लिया है, जिसमे पास से 11 अंतर्राष्ट्रीय फोन जप्त किया गया है। वह ‘कार बम‘ लगाने की तैयारी कर रहा था।‘‘

कैबेलो ने बताया कि हेयसाम मोकल्ड नामक भाड़े के उस सैनिक के पास काफी भारी भरकम विदेशी बैंक एकाउण्ट है। जिसकी जांच हो रही है।

अरागुआ के गर्वनर तारेक अल एईसामी ने कहा कि ‘‘उसकी गिरफ्तारी 24 को सुबह हुई। वह अपने आप में इस बात का प्रमाण है, कि वह भावी आतंकी हमले की तैयारी कर रहा था। उसके पास मिले कागजात इस बात के प्रमाण हैं, कि उसके सम्बंध मियामी (अमेरिका) के एक कम्पनी से हैं।‘‘

साइंस एण्ड टेक्नोलाॅजी मिनिस्टर मैनूअल फर्डाण्डिज ने 24 फरवरी को बताया कि अब तक 10 मिलियन बोलिवर (1.6 मिलियन डाॅलर) के सार्वजनिक सम्पत्ति का नुक्सान हुआ है। 18 लोगों की मृत्यु हुई है। और 30 लोगों की मृत्यु गैस, धुआं और दंगों से बनी स्थितियों की वजह से हुई। कम से कम 150 लोग घायल हुए और लगभग 712 लोगों को हिरासत में लिया गया। जिसमें 55 लोगों पर गंभीर अपराध का आरोप है।

बोलिवेरियन सिक्यूरिटी फोर्स के 2 आॅफिसर को हिरासत में लिया गया है। प्रारम्भिक जांच के अनुसार इन्हीं के गन से 12 फरवरी को जुआन मोन्टोया और बासिल दा कोस्टा की हत्या की गयी है।

काराबोबो स्टेट में हथियारों के एक बड़े जखीरे को जप्त किया गया है। इन छोटी-बड़ी खबरों को यदि आपस में जोड़ दिया जाये तो, दक्षिणपंथी प्रतिक्रियावादी ताकतों ने साम्राज्यवादी अमेरिका और बाजारवादी ताकतों से मिल कर वेनेजुएला में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने और जन असंतोष को बढ़ा कर एक सफल तख्तापलट की कोशिश की, जो फरवरी विद्रोह में बदल गया। विश्वविद्यालयीन छात्रों के जिस वर्ग ने इन हिंसक प्रदर्शनों में हिस्सा लिया है, जिनकी नाराजगी को आज भी विदेशी मीडिया प्रचारित कर रही है, उसका सच सिर्फ इतना है, कि शाॅवेज से पहले पूरे वेनेजुएला में मात्र 6,00,000 विश्वविद्यालयीन छात्र थे, मगर शाॅवेज की नीतियों का ही परिणाम है, कि आज वेनेजुएला लातिनी अमेरिका और कैरेबियन देशों में शिक्षा के स्तर पर दूसरे नम्बर पर है और विश्व में उसकी जगह 5वें नम्बर पर है। और वर्तमान वेनेजुएला में 30 लाख विश्वविद्यालयीन छात्र है। जिनमें से ज्यादातर छात्रों का समर्थन देश की मदुरो सरकार के साथ है।

26 फरवरी को वेनेजुएला में शांतिवार्ता आयोजित की गयी। इस वार्ता में सोशलिस्ट मोमेन्ट एण्ड कम्युनिटी, व्यवस्थापक वर्ग एवं धार्मिक समूह ने समर्थन की घोषणा की हैं मगर प्रमुख विपक्षी दल -एवं एमयूडी ने इसमें शामिल होने से इंकार कर दिया। यह शांति वार्ता काराकस में आयोजित की गयी थी। कैबेलो ने विपक्षी समूहों द्वारा वार्ता में शामिल न होने की आलोचना की और संभावना जतायी कि भविष्य में होने वाले वार्ता में वो शामिल होंगे। उन्होंने कहा- ‘‘हमने अपना हाथ बढ़ा दिया है, कि चलिये वेनेजुएला की शांति और स्थिरता के लिये हाथ मिलाते हैं।‘‘

मगर, शांति और सड़क पर बने रहने की मांग विपक्ष की ऐसी नीतियां हैं, जिसका वास्तविक शांति एवं स्थिरता से कोई वास्ता नहीं रह गया है। उनका मकसद उन ताकतों का हाथ बंटाना है, जो आम जनता के पक्ष में खड़ी समाजवादी सरकार को ‘क्षेत्र के लिये कैंसर‘ समझते हैं। जो खुद एक ऐसी नस्ल में तब्दील हो गये हैं, जिनके बने रहने से पृथ्वी के मिटने का खतरा रोज बढ़ता जा रहा है। जिनका मिटना तय है।

लातिनी अमेरिका एवं कैरेबियन देशों की गैर-पूंजीवादी और समाजवादी देशों ने वेनेजुएला पर हो रहे आर्थिक हमलों और राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने के लिये जारी हिंसक प्रदर्शनों के विरूद्ध वेनेजुएला के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त की है। उन्होंने अमेरिकी साजिशों की निंदा की और हर स्तर पर अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की है।

वेनेजुएला के विदेशमंत्री इलियास जोआ मेर्कोसुर देशों की यात्रा की, ताकि वो वेनेजुएला में हो रहे वारदातों की सही जानकारी दे सके। 26 फरवरी की शाम को वो पराग्वे पहुंचे, 27 फरवरी की सुबह अर्जेन्टीना और उसके बाद 27 फरवरी की शाम को ही उरूग्वे गये और वहां से ब्रजील की उन्होंने यात्रा की। वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिकी सरकार अपने लिये ‘‘आर्गनाईजेशन आॅफ अमेरिकी स्टेटस्‘‘ -ओएएस- में भी पर्याप्त समर्थन हासिल नहीं कर सका। 32 में से 29 देशों ने वेनेजुएला में हस्तक्षेप के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। पनामा और कनाडा ही उसके पक्ष में खड़े हो सके। दो दिवसीय अधिवेशन में 29 देशों ने यह कहा कि वेनेजुएला की चुनी हुई सरकार के खिलाफ हो रहे हिंसक प्रदर्शनों के लिये वहां की प्रतिक्रियावादी ताकतें जिम्मेदार हैं। उन्होंने वेनेजुएला सरकार के द्वारा ‘शांतिवार्ता‘ के प्रस्ताव को अपना समर्थन दिया और वार्ता के जरिये ही समाधान को एकमात्र रास्ता बताया। उन्होंने किसी भी बाहरी हस्तक्षेप के प्रस्ताव को एक सिरे से खारिज कर दिया। 7 मार्च का यह निर्णय अमेरिकी सरकार की अपनी नाकामी है।

वेनेजुएला में फरवरी विद्रोह की धार भले ही कमजोर पड़ गयी है और राजनीतिक अस्थिरता पैदा कर तख्तापलट की कोशिशें भले ही नाकाम सी हो गयी हैं, मगर अमेरिकी साजिशों का अभी अंत नहीं हुआ है, और हिंसक प्रदर्शन जारी है। क्योंकि महाद्वीपीय एकजुटता और विकास के जरिये समाजवाद की वेनेजुएला पहचान बन चुका है। हां, यह अच्छी बात है कि अमेरिका की कूटनीतिक पराजय की शुरूआत हो चुकी है। वेनेजुएला सीरिया के बाद दूसरी कड़ी है, जिसे श्रृंखला में बदलना है।

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