ओबामा प्रकरण – शिखर वार्ताओं के मुद्दों को गायब रखने की कवायत

ओबामा प्रकरण – शिखर वार्ताओं के मुद्दों को गायब रखने की कवायत

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश पर जूतों की मेहरबानी रही। फेके तो गये मगर पड़ा नहीं। बराक ओबामा की वैश्विक विदाई अपने लिये रचे गये विशेष से कमतर व्यवहार और अब गालियों की सौगात से हो रही है। ...

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निखिल ‘नादां’ की तीन कविताएं

निखिल ‘नादां’ की तीन कविताएं

1. बातें बातें बहुत जरुरी हैं, एक रोज़ कुछ हुआ तुम्हे, तुमने एक दो बातें कम कीं मुझसे, अगली रोज़ मैंने भी दो बातें कम की तुमसे | फिर एक रोज़, बातें बंद हो गयी | दीवारों से, तुम्हारी दी ...

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कश्मीर – वर्दी और वार्ता की मेज के बीच

कश्मीर – वर्दी और वार्ता की मेज के बीच

बुरहान वानी का मामला कुछ ऐसे तूल पकड़ेगा, कि कश्मीर से दिल्ली ही खारिज होता जायेगा, इस बात की खबर किसी को नहीं थी, न केंद्र की मोदी सरकार को ना ही पीडीपी और भाजपा की महबूबा सरकार को। दोनों ...

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बाढ़ का चेहरा

बाढ़ का चेहरा

इस बीच हमें तबीयत की मार झेलनी पड़ी, बाढ़ का खतरा उठाना पड़ा। इरादे न होते तो शायद हम जीने के लायक ही न बचते, मगर ऐसा नहीं हुआ। अच्छी बात बस इतनी है, कि शहर की सड़कों पर घूमती ...

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चुनाव अपने ब्राॅण्ड की मार्केटिंग

चुनाव अपने ब्राॅण्ड की मार्केटिंग

खबर ताजा है- उत्तर प्रदेश में कांग्रेस है। यह भी खबर है- कि कांग्रेस मुक्त भारत के बयान से भाजपा पलट गयी है। वजह है, और दोनों ही वजह जायज है। सोनिया गांधी का रोड-शो सफल रहा। उम्मीद से ज्यादा ...

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स्मिता की पांच कविताएँ

स्मिता की पांच  कविताएँ

1. संवादहीनता की स्थिति में अब इसका निर्णय कौन लेगा कि तुम सही हो या गलत इस विभ्रम की स्थिति में जब तुम ही प्रेक्षक हो इस कालचक्र के जहाँ वक़्त जकड़ा हुआ है तुम्हारे ही तर्कों में उस एक ...

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इस्लामिक स्टेट का आतंक(?) फ्रांस पर आतंकी हमला

इस्लामिक स्टेट का आतंक(?) फ्रांस पर आतंकी हमला

फ्रांस पर आतंकी हमला(?) ठीक उस दिन हुआ, जिस दिन बास्तिल जेल का पतन हुआ था और 1789 में फ्रांस की राजक्रांति हुई थी। जिसके मूल में स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व की सोच और फ्रांस में लोकतंत्र है। 15 जुलाई ...

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सब कुछ सहने का सन्नाटा?

सब कुछ सहने का सन्नाटा?

आज की तारीख में किसी के लिये यह बताना मुश्किल है, कि ‘‘हम कहां हैं?‘‘ क्योंकि हमारे होने की पहचान मिट गयी है। यदि आप कहते हैं कि ‘‘हम इंसान हैं‘‘ तो घड़ी के कांटे और मशीनों के पुर्जे आपकी ...

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काठ के पुतला को महान समझने की भूल

काठ के पुतला को महान समझने की भूल

देश की सरकार सिर्फ चुनाव लड़ रही है। उसके सिर पर मिशन-2017 और मिशन 2019 का भूत सवार है। यह भूत उसने खुद ही सवार किया है। भाजपा ने जो जीत 2014 के लोकसभ चुनाव में हासिल की, उसे लगता ...

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बद्जुबानी और सेंधमारी का मसला

बद्जुबानी और सेंधमारी का मसला

मायावती के खिलाफ भाजपा ने जहर उगल दिया। अच्छा किया। मोहतरमा दलित समाज के लिये राजनीतिक बहन जी थीं, अब बकौल उनके ‘देवी‘ बन गयीं। बसपा के जिन छत्रपों के खिसकने से मायावती के पांव के नीचे से जमीन खिसक ...

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