ग – रामनाथ राय

ग – रामनाथ राय

दोपहर में तेज धूप होने के कारण सड़क का पिच भी मानो गलना शुरू हो गया था। गले हुए इसी पिच के रास्ते बसें चल रही हैं, सड़क पर ट्रामें चल रही हैं। उसी सड़क पर लोग भी चल रहे ...

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देश को उद्योगपतियों को सौंपने का अवसर

देश को उद्योगपतियों को सौंपने का अवसर

केंद्र की मोदी सरकार ने देश को निजी कम्पनियों और उद्योगपतियों को सौंपने का अवसर निकाल लिया है। यह अवसर उसने चीन के स्टाॅक मार्केट में आयी गिरावट और चीन के द्वारा अपनी मुद्रा -युआन के अवमूल्यन से पैदा हुई ...

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अनवर सुहैल की दस कविताएं – किश्त दो

अनवर सुहैल की दस कविताएं – किश्त दो

6. फिदायीन वो निकल गया फैक्ट्री बिना लगाये सील मोहर बिना टेस्ट प्रमाणित हुए कि अभी कच्चा था वो अपरिक्व बच्चा था वो जन्नत की हूरों का आशिक दूसरी दुनिया में खुद के लिए पाने को उम्दा मुकाम अपनी दुनिया ...

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अफ्रीकी देशों में चीन और अमेरिका की उपस्थिति

अफ्रीकी देशों में चीन और अमेरिका की उपस्थिति

अफ्रीका महाद्वीप में चीन और अमेरिका के बीच आर्थिक एवं सामरिक प्रतिस्पद्र्धा बढ़ रही है। चीन आर्थिक विकास और प्राकृतिक सम्पदा के दोहन के साथ सामाजिक विकास योजनाओं का साझेदार बन रहा है। वह अपनी सामरिक स्थिति भी अब मजबूत ...

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अनवर सुहैल की दस कविताएं – किश्त एक

अनवर सुहैल की दस कविताएं – किश्त एक

अनवर सुहैल की दस कवितायें हमारे सामने हैं – सिलसिलेवार! जैसे एक नदी अपने ही किनारों को छू कर बहती है! बात हदों और किनारों की करती है, मगर बात सिर्फ हदों और किनारों की नहीं होती, उससे आगे की ...

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बाजारवाद का हासिल – वैश्विक वित्तीय संकट

बाजारवाद का हासिल – वैश्विक वित्तीय संकट

चीन के मंदी का असर दुनिया के अर्थव्यवस्था पर कितना पड़ेगा, और क्या होगा? यह एक सवाल है। जिससे सिर खपाने वालों की कमी नहीं, और जो भी सिर खपा रहा है, उसके माथे पर गंभीर लकीरें हैं, क्योंकि वैश्विक ...

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बाजार में संसद कहां है?

बाजार में संसद कहां है?

भारत में राजनीतिक परिदृश्य में वामपंथी हैं, और दक्षिणपंथी भी हैं। और जब दोनों है, तो तीसरे का होना अपने आप जरूरी हो जाता है, तो जान लें कि, वह तीसरा भी है। राजनीतिक दलों के नाम के आधार पर ...

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किसके भरोसे हैं काम के अवसर?

किसके भरोसे हैं काम के अवसर?

यदि कोई आदमी, किसी दूसरे के भरोसे कूदे तो उसे आप क्या कहेंगे? या कोई अपनी जिम्मेदारी किसी दूसरे के कंधे पर लादे, तो उसे आप क्या कहेंगे? कितना विश्वास करेंगे उस पर या उसकी बातों पर? आज सरकारें यही ...

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बाजार के लिये पैंतरेबाजी

बाजार के लिये पैंतरेबाजी

2007-08 का वैश्विक वित्तीय संकट अभी बीता नहीं, कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी चीन की अर्थव्यवस्था लड़खड़ा गयी! उसके स्टाॅक मार्केट में भारी गिरावट दर्ज की गयी और एक बार फिर से वैश्विक वित्तीय व्यवस्था के सामने गंभीर संकट ...

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साहित्य का बाजार में होना

साहित्य का बाजार में होना

आज कल बाजार की बड़ी धूम है। ऐसे में एक सवाल आप से- ‘‘साहित्य यदि बाजार में हो, तो आपको कैसा लगेगा?‘‘ हो सकता है, आपको कुछ न लगे! और हो यह भी सकता है, कि आप अपने लगने को ...

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