बाजारवाद का हासिल – वैश्विक वित्तीय संकट

बाजारवाद का हासिल – वैश्विक वित्तीय संकट

चीन के मंदी का असर दुनिया के अर्थव्यवस्था पर कितना पड़ेगा, और क्या होगा? यह एक सवाल है। जिससे सिर खपाने वालों की कमी नहीं, और जो भी सिर खपा रहा है, उसके माथे पर गंभीर लकीरें हैं, क्योंकि वैश्विक ...

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बाजार में संसद कहां है?

बाजार में संसद कहां है?

भारत में राजनीतिक परिदृश्य में वामपंथी हैं, और दक्षिणपंथी भी हैं। और जब दोनों है, तो तीसरे का होना अपने आप जरूरी हो जाता है, तो जान लें कि, वह तीसरा भी है। राजनीतिक दलों के नाम के आधार पर ...

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किसके भरोसे हैं काम के अवसर?

किसके भरोसे हैं काम के अवसर?

यदि कोई आदमी, किसी दूसरे के भरोसे कूदे तो उसे आप क्या कहेंगे? या कोई अपनी जिम्मेदारी किसी दूसरे के कंधे पर लादे, तो उसे आप क्या कहेंगे? कितना विश्वास करेंगे उस पर या उसकी बातों पर? आज सरकारें यही ...

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बाजार के लिये पैंतरेबाजी

बाजार के लिये पैंतरेबाजी

2007-08 का वैश्विक वित्तीय संकट अभी बीता नहीं, कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी चीन की अर्थव्यवस्था लड़खड़ा गयी! उसके स्टाॅक मार्केट में भारी गिरावट दर्ज की गयी और एक बार फिर से वैश्विक वित्तीय व्यवस्था के सामने गंभीर संकट ...

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साहित्य का बाजार में होना

साहित्य का बाजार में होना

आज कल बाजार की बड़ी धूम है। ऐसे में एक सवाल आप से- ‘‘साहित्य यदि बाजार में हो, तो आपको कैसा लगेगा?‘‘ हो सकता है, आपको कुछ न लगे! और हो यह भी सकता है, कि आप अपने लगने को ...

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वैश्विक वित्तीय संकट और चीन

वैश्विक वित्तीय संकट और चीन

जिस विश्वव्यापी मंदी की आशंकायें व्यक्त की जा रही थीं, वह अब दुनिया के बाजार में है। चारो ओर हड़कम्प मचा हुआ है। सभी अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने, संकट से मिले मौके का फायदा उठाने और दुनिया की आम जनता ...

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कम्पनियों के विलय और खरीदी का दौर

कम्पनियों के विलय और खरीदी का दौर

2007-08 के वैश्विक मंदी से, विश्व अर्थव्यवस्था अभी उबर भी नहीं पायी है, कि उससे भी बड़े वैश्विक मंदी की दस्तक पड़ने लगी है। स्थितियां जैसी बन गयी हैं, आशंका इस बात की है, कि अक्टूबर 2015 में दुनिया की ...

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शिरीष मौर्य की आठ कविताएं

शिरीष मौर्य की आठ कविताएं

1. कुछ प्रलापों से पहले एक बिखरा हुआ, टूटता-सा आलाप गांधार निषाद और धैवत का (बसें गिर जाती हैं पहाड़ों से/लील जाती हैं नदियां उन्हें भी/जिनकी वे प्रिय थीं) मृतकों का संसार बढ़ता जा रहा है उसे और बढ़ाने कुछ ...

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भारत में चीन की कम्पनियों की उपस्थिति

भारत में चीन की कम्पनियों की उपस्थिति

भारत और चीन के रिश्ते को भारतीय मीडिया राजनीतिक नजरिये से देखती है। पश्चिमी मीडिया की तरह ही उसे आर्थिक एवं सामरिक प्रतिद्वंदी करार देती रही है। यह प्रमाणित करना ही उनका लक्ष्य होता है, कि चीन भारत के लिये ...

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मोदी के लिये मूडीज़ की राहें

मोदी के लिये मूडीज़ की राहें

ग्लोबल रेटिंग एजेन्सी ‘मूडीज़ इन्वेस्टर सर्विस‘ ने 18 अगस्त को जारी किये गये ‘ग्लोबल मैक्रो आउटलुक – 2015-16‘ की रिपोर्ट में भारत के आर्थिक विकास दर को 7.5 प्रतिशत से घटा कर 7 प्रतिशत कर दिया और लगे हाथ निवेश ...

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