नौटंकी में नाटक और फिल्मों का सस्पेंस

नौटंकी में नाटक और फिल्मों का सस्पेंस

इस बीच देश की आब-ओ-हवा कुछ ऐसे बदली है, कि ‘महाबली‘ और ‘बजरंगी भाईजान‘ के होते हुए भी नौटंकी देखने वालों की तादाद बढ़ी है। लोगों को नौटंकी देखने में मजा आने लगा है। उन्हें लगने लगा है, कि मनोरंजन ...

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पंकज चतुर्वेदी की तीन कविताएँ

पंकज चतुर्वेदी की तीन कविताएँ

1. 1947 में (सईद अख़्तर मिर्जा की फि़ल्म ‘नसीम’ देखकर) 1947 में जो मुसलमान थे उन्हें क्यों चला जाना चाहिए था पाकिस्तान ? जिन्होंने भारत में ही रहना चाहा उन्हें ग़रीब बनाये रखना क्यों ज़रूरी था ? जिस जगह राम ...

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संसद के बंद होते दरवाजे

संसद के बंद होते दरवाजे

संसद का मानसून सत्र बीत गया। भूमि अधिग्रहण विधेयक श्रम कानूनो मे संशोधन विधेयक और वस्तु एवं सेवा कर विधेयक सहित कई विधेयकों को पारित कराने की सरकार की मंसा पूरी नहीं हुई। जिन्हें इस बात से दुखी होना चाहिये, ...

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मूडीज के बाद एसोचैम की रिपोर्ट

मूडीज के बाद एसोचैम की रिपोर्ट

ग्लोबल रेटिंग एजन्सी -‘मूडीज कार्प‘ के बाद ‘एसोचैम‘ की रिपोर्ट आ गयी है। भारत में आर्थिक सुधारों का मुद्दा इन एजेन्सियों के लिये महत्वपूर्ण हो गया है। वजह बिल्कुल साफ है, कि राष्ट्रीय-बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के लिये भारत का महत्व बढ़ ...

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वरिष्ठ साहित्यकार विष्णुचंद्र शर्मा जी के संस्मरण ‘इंसान हैं’ पर एक पाठकीय टिप्पणी

वरिष्ठ साहित्यकार विष्णुचंद्र शर्मा जी के संस्मरण ‘इंसान हैं’ पर एक पाठकीय टिप्पणी

भाई नित्यानंद गायेन के तात्कालिक वाराणसी प्रवास की अनेक उल्लेखनीय स्मृतियों में से एक महत्वपूर्ण दृश्य था थके-थके से लोलार्क द्विवेदी जी का अस्सी घाट की असुविधाजनक सीढियाँ उतरना । अपने पूरे साहित्यिक और बनारसी भंगिमा के साथ लोलार्क जी ...

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इक्वाडोर – विधेयकों के विरूद्ध सरकार को बेदखल करने की लड़ाई – 2

इक्वाडोर – विधेयकों के विरूद्ध सरकार को बेदखल करने की लड़ाई – 2

दोनों ही विधेयक – 5 जून को पेश ‘इन हेरिटेज टैक्स‘ और 8 जून को पेश- ‘केपिटल गेन टैक्स‘- इक्वाडोर के नेशनल असेम्बली में है। जिसके खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों और सरकार के पक्ष में हो रहे प्रदर्शनों को देखते ...

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प्रभात मिलिंद की कविता

प्रभात मिलिंद की कविता

चूहे भादो के काले बदराये दिन हों या पूस की चुभने वाली ठंढ रातें जब एकदम निश्शब्द हो जाती हैं थक कर बेसुध…औंधी गिरीं, और गहरी स्याह जड़ता, अँधेरे और सन्नाटे के ख़िलाफ़ तभी किसी एकांत से दर्ज़ होती है ...

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मुद्दे उछल रहे हैं!

मुद्दे उछल रहे हैं!

भारतीय लोकतंत्र धीरे-धीरे अपने ताबूत की ओर बढ़ रहा है। काम के नजरिये से देखा जाये तो संसद ठप्प है। लोकसभा में सत्तारूढ़ भाजपा विपक्ष के बिन, काम कर रही है। राज्यसभा में, जहां सरकार के पक्ष में सहयोग नहीं ...

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गलोबल रेटिंग एजेन्सी की मेज पर भारत

गलोबल रेटिंग एजेन्सी की मेज पर भारत

ग्लोबल रेटिंग एजेन्सी की मेज पर किसी देश के होने का मतलब है, कि निवेशकों के लिये आर्थिक सुधारों की मांग को बढ़ाया जा रहा है। उस देश की सरकार पर इस दबाव को बढ़ाया जा रहा है, कि ‘‘उसकी ...

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प्रदीप त्रिपाठी की चार कविताएँ

प्रदीप त्रिपाठी की चार कविताएँ

1. कविता में अचानक चुप हो जाना’ महापुरुषों की फसलें अब सूख गई हैं संताप-संलिप्त-जिजीविषाओं के विस्मृत कंठ खूँटे से बंधे विचारों के साथ अट्टहास करते हुए आम आदमियों की जुगाली और जुगलबंदियों के खंडहर-बीच अपने-अपने वजूदों के द्वंद्व में ...

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