पोस्टर

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‘जो गुनाह हमने किये नहीं उन गुनाहों की सजा हमें मिलेगी’, खबर पक्की है। और मैं समझता हूं कि सजा हमें मिलनी भी चाहिए कि हमने देखा नहीं उस कल को बिगड़ते हुए जो हमारा आज है…शहादत के बाद नयी ...

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मतलबी और कम मतलबी सरकारें

मतलबी और कम मतलबी सरकारें

‘कम्युनिस्टों की बात तो आप करें नहीं। वो कहीं नहीं हैं।’ उन्होंने कहा और हमने मान लिया। हमारा यह मानना चुनावी समर और दलगत आधार पर है। आम जनता को अपने पक्ष में मतों में बदलने से है। हमारी सहमति ...

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नारे मुंह चिढ़ा रहे हैं!

नारे मुंह चिढ़ा रहे हैं!

होली से एक दिन पहले। शहर के मॉल, पेट्रोल पम्प, शोरूम और ऐसी बड़ी दुकानें, जिनमें कांच और शीशे लगे हैं उन पर मोटे कपड़े तान दिये गये, पॉलीथिन और गत्ते लगा दिये गये। उनके साइन बोर्ड को भी ढ़ंक ...

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नोटबंदी का ‘रिटर्न गिफ्ट’

नोटबंदी का ‘रिटर्न गिफ्ट’

पांच राज्यों के विधान सभा चुनाव परिणामों से पहले 9 मार्च के आलेख में हमने लिखा था- ‘‘भाजपा इकलौती ऐसी पार्टी है राष्ट्रीय स्तर पर, जिसके पास नरेन्द्र मोदी के अलावा कोई दूसरी सूरत नहीं है। मोदी ऐसे प्रचारित ‘जन ...

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चुनी हुई सरकारें लोकतंत्र के लिये बड़ा खतरा

चुनी हुई सरकारें लोकतंत्र के लिये बड़ा खतरा

चुनाव जनतंत्र का झूठा चेहरा बन कर रह गया है। आम जनता चाह कर भी अपना प्रतिनिधि नहीं चुन सकती। जिन जन प्रतिनिधियों से जनतंत्र में चुनी हुई सरकारें बनती हैं, वे जन प्रतिनिधि आम जनता का प्रतिनिधित्व ही नहीं ...

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पार्टी की तरह दिखते नेता

पार्टी की तरह दिखते नेता

राजनीतिक दल की तरह दिखते नेता यदि मौजूदा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव की विशेषता है, तो भारतीय लोकतंत्र के लिये यह घटित होती दुर्घटना भी है। जिसकी शुरूआत भले ही राष्ट्रीय कांग्रेस के विभाजन से हुई, मगर जिसका चरम ...

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मुद्दों को खारिज करने की रणनीति

मुद्दों को खारिज करने की रणनीति

उत्तर प्रदेश में भाजपा मुद्दों को खारिज रखने की रणनीति के तहत विधानसभा चुनाव लड़ रही है। वजह सिर्फ एक है, कि आर्थिक विकास एक पांव पर खड़ी है, और जन समस्याओं का समाधान उसके पास नहीं है। जिसे वह ...

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सोवियत क्रांति और सोवियत संघ के पतन के बहाने – 1

सोवियत क्रांति और सोवियत संघ के पतन के बहाने – 1

सोवियत संघ की सर्वहारा क्रांति का यह शताब्दी वर्ष है। सोवियत क्रांति के साथ ही अब सोवियत संघ के विघटन का जिक्र जरूरी है, इसलिये नहीं कि सोच के स्तर पर मार्क्सवाद को असंदर्भित करार दिया जा सके, लेनिनवाद के ...

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बद्जुबानी भी तो जुबान है

बद्जुबानी भी तो जुबान है

बातों और बकवासों की राजनीति चल पड़ी है। यह क्या कह दिया अखिलेश जी आपने कि ‘‘महानायक गुजरात के गदहों का प्रचार बंद करें।’’ अब आप ही बताईये, सदी ही यदि गदहों की है, तो सदी के नायक या महानायक ...

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चिनम्मा कोई सबक नहीं

चिनम्मा कोई सबक नहीं

चिनम्मा कोई सबक नहीं। राजनीतिक गलियारे में भ्रष्टाचार की परम्परा बड़ी समृद्ध है। तमिलनाडु की राजनीति में वी. के. शशिकला सत्ता के गलियारे में ही रह गयी, उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के बाद सत्ता तक पहुंचने की कोशिशें जरूर की, ...

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