पुर्तगाल- संसद की कटौतियों को कोर्ट के द्वारा खारिज किया जाना

पुर्तगाल- संसद की कटौतियों को कोर्ट के द्वारा खारिज किया जाना

पुर्तगाल की संवैधानिक कोर्ट ने, 2013 के लिये सरकार द्वारा घोषित 9 कटौतियों में से 4 कटौतियों को निरस्त कर दिया है। 5 अप्रैल को निरस्त की गयी इन कटौतियों से 900 मिलियन यूरो -1.17 बिलियन डालर- का रेवेन्यू और ...

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आतंकवाद के खिलाफ अमेरिकी साम्राज्य

आतंकवाद के खिलाफ अमेरिकी साम्राज्य

अमेरिकी सरकार के राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय रूप से, इस बात की सहुलियतें हासिल कर ली है, कि वह जिसे चाहे आतंकवादी घोषित कर सकती है। किसी भी संगठन, किसी भी राजनीतिक दल या किसी भी देश को आतंकवादी होने की ...

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यूरोप के 80 प्रतिशत लोग यूरोपीय संघ के खिलाफ हैं

यूरोप के 80 प्रतिशत लोग यूरोपीय संघ के खिलाफ हैं

अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष यह मानता है कि ”यूरोजोन, दुनिया की वर्तमान अर्थव्यवस्था के लिये, सबसे बड़ा खतरा बन गया है।” जिसकी अर्थव्यवस्था इस साल 0.3 प्रतिशत और सिकुड़ सकती है। 16 अप्रैल को ‘वल्र्ड इकोनामिक आउटलुक’ को जारी करते हुए अंतर्राष्ट्रीय ...

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चीन की तीखी प्रतिक्रिया

चीन की तीखी प्रतिक्रिया

भारत और चीन के रिश्तों को सिर्फ सीमा विवाद के नजरिये नहीं देखा जा सकता। स्थितियां उससे आगे निकल गयी हैं और दोनों देशों की जिम्मेदारियां उससे बड़ी है, हमारे लिये यह एशिया की शांति एवं स्थिरता से जुड़ा हुआ ...

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आदर्श राज्य का बाजारवादी माडल, 2014 के लिये!

आदर्श राज्य का बाजारवादी माडल, 2014 के लिये!

भारतीय अर्थव्यवस्था की राजनीतिक तस्वीर बड़ी कुरूप है। मनमोहन सिंह ने उदारीकरण की जितनी भी तस्वीरें बांटी, उसके पीछे लकवाग्रस्त परिस्थितियां हैं, कि ‘आम आदमी को मुसीबत के अलावा और कुछ नहीं मिला।” हां, चंद लोगों के पौ-बारह है। मजा ...

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सरकार के बदलने से, व्यवस्था नहीं बदलती?

सरकार के बदलने से, व्यवस्था नहीं बदलती?

‘ग्लोबल हंगर इंडेक्स-2012’ के अनुसार- ”दुनिया की बहुसंख्यक भूख से पीडि़त आबादी भारत में रहती है।” वह भी तब, जब कि देश में खाधान्न की कमी नहीं है। खाधान्न हमारी सरकार के पास है, मगर 10 करोड़ से अधिक लोग ...

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हारे हुए लोगों के साथ

हारे हुए लोगों के साथ

सपनों में हम हारे हुए लोगों के साथ होते हैं। इसलिये जागने के बाद सपने टूटते नहीं, सवाल करते हैं, जानना चाहते हैं, उन लोगों के बारे में जो सपनों में आते हैं। जिनके बदन पर होते हैं जख्मों के ...

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वित्तीय तानाशाही के हम कितने करीब हैं?

वित्तीय तानाशाही के हम कितने करीब हैं?

राजकीय भवनों, औधोगिक संस्थानों, भव्य और विशाल राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालयों और चौड़ी सड़कों से यदि किसी देश की सूरत बनायी जा सकती, तो संयुक्त राज्य अमेरिका से बेहतर कोर्इ देश नहीं होता। रूस के बारे में भी हम अपनी ...

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विकास के जरिये समाजवाद, आसान नहीं है

विकास के जरिये समाजवाद, आसान नहीं है

‘विकास के जरिये समाजवाद’ के जिस अवधारणां को लातिनी अमेरिका और कैरेबियन देशों में विकसित किया जा रहा है, वह आसान नहीं है। गये साल पराग्वे में राष्ट्रपति फर्नाण्डो लुगो का जिस तरह वैधानिक तख्तापलट किया गया और वेनेजुएला में, ...

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आज की दुनिया पूंजीवाद के अवसान और माक्र्सवाद के संभावनाओं की दुनिया है

आज की दुनिया पूंजीवाद के अवसान और माक्र्सवाद के संभावनाओं की दुनिया है

20वीं सदी के अंतिम दशक में यह मान लिया गया, कि माक्र्सवाद की चुनौतियां खत्म हो गयी हैं, और सोवयित संघ के पतन के साथ ही अक्टूबर क्रांति का अंत हो गया है। लेनिन को गहरी नींद आ गयी है। ...

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