पेशेवर विद्रोहियों की बढ़ती दखल

पेशेवर विद्रोहियों की बढ़ती दखल

सीरिया आज की दुनिया का आर्इना बन गया है, जहां अमेरिकी साम्राज्य, पशिचमी ताकतें, नाटो सैन्य संगठन और अरब जगत के उनके मित्र देश और पेशेवर आतंकी-विद्रोही, एक देश को कुचलने की साजिशों में लगे हैं। गृहयुद्ध जारी है और ...

Read More »

सूचना के विकेंद्रीकरण के खिलाफ अमेरिकी सरकार

सूचना के विकेंद्रीकरण के खिलाफ अमेरिकी सरकार

11 जनवरी को बु्रकलीन के अपने अपार्टमेण्ट में 26 वर्षीय एरोन स्वार्टज मृत पाये गये। न्यूयार्क पुलिस का कहना है कि ”उन्होंने आत्महत्या की” किंतु स्वार्टज के पिता और उनको मानने वाले मानते हैं कि ”उनकी हत्या की गयी है।” ...

Read More »

अमेरिका में चीन का होना

अमेरिका में चीन का होना

यदि आज हम यह कहें कि संयुक्त राज्य अमेरिका के पास उसका अपना कुछ भी नहीं है, न सोच, न समझ, ना ही उसकी समृद्धि, तो अमेरिका को महान समझने वालों को गहरा झटका लगेगा। उनकी पहली प्रतिक्रिया होगी कि ...

Read More »

अफ्रीकी देश माली में सैन्य हस्तक्षेप

अफ्रीकी देश माली में सैन्य हस्तक्षेप

औपनिवेशिक ताकतों के आगे-आगे जैसे चर्च और मिशनरियां चला करती थीं, अफ्रीका और एशिया में साम्राज्यवादी ताकतों के आगे-आगे इस्लामी संगठन और अलकायदा चल रहे हैं। इस्लामी आतंकवाद और अलकायदा का धुआं फैला कर अमेरिका और पशिचमी देशों के हितों ...

Read More »

लोहे की लगाम

लोहे की लगाम

”कर्इ बार ऐसा होता है कि लोग ‘थू-थू’ करते हैं, मगर थूक नहीं निकलता, और जब निकलता है, अपने ही मुंह पर पड़ता है।” हमने कहीं पढ़ा। पढ़ कर अच्छा लगा। खुद से पूछना पड़ा- ”ऐसा कब होता है?” ”ऐसा ...

Read More »

सामाजिक समस्याओं का निजीकरण

सामाजिक समस्याओं का निजीकरण

‘दिल्ली गैंगरेप’ ने कर्इ सवालों को सतह के ऊपर ला दिया है। यह सोचने के लिये विवश कर दिया है कि तमाम आर्थिक एवं राजनीतिक परिवर्तन के बाद भी, समाज की आधी आबादी की हालत वह नहीं है, जो ऊपर ...

Read More »

भारत-पाक – बुलेटप्रूफ कण्टेनर में बैठकर क्रांति

भारत-पाक – बुलेटप्रूफ कण्टेनर में बैठकर क्रांति

भारत और पाकिस्तान के बीच, युद्धविराम और शांतिवार्ता के दौरान भी, युद्ध और आतंक की सिथतियां बनी रहती हैं। सीमा विवाद और कश्मीर का मुददा दोनों ही देशों के बीच खड़ा रहता है। पाकिस्तान आज तक स्वीकार नहीं कर सका ...

Read More »

संस्कृति का स्वरूप, महाद्वीपीय हो रहा है

संस्कृति का स्वरूप, महाद्वीपीय हो रहा है

संस्कृति की चर्चा हम चाहे जिस रूप में करें, वह विभाजित ही रहेगी, क्योंकि समाज विभाजित है, परिवेश विभाजित है, भौगोलिक परिसिथतियां विभाजित हैं और इन सबसे निर्मित सोच विभाजित है। संस्कृति के कैनवास को लोग हमेशा बड़ा कर देते ...

Read More »

लातिनी अमेरिकी देशों की महाद्वीपीय एकजुटता

लातिनी अमेरिकी देशों की महाद्वीपीय एकजुटता

लातिनी अमेरिकी देशों की महाद्वीपीय एकजुटता, उनके हर एक निर्णय और उनकी हर एक गतिविधियों में, साफ तौर पर नजर आने लगी है। जिसके मूल में विकास के जरिये समाजवाद और बोलिवेरियन क्रांति है। राज्य को सामाजिक विकास की अनिवार्यता ...

Read More »

राजसत्ता के लिये, राजनीतिक बाजी

राजसत्ता के लिये, राजनीतिक बाजी

हम यह मानते हैं कि मौजूदा आर्थिक, सामाजिक एवं राजनीतिक परिदृश्य को बदलने का काम, देश की आम जनता कर सकती है। हमारी अपेक्षायें किसी भी राजनीतिक दल, संगठन या मुददों को खड़ा करके, उन्हें लावारिश छोड़ने वालों से नहीं ...

Read More »
Scroll To Top