सहयोग एवं समर्थन की राजनीति

सहयोग एवं समर्थन की राजनीति

सहयोग एवं समर्थन की राजनीति, और सहयोग एवं समर्थन की अर्थव्यवस्था ने, लातिनी अमेरिकी देशों को एकसूत्र में बांधना शुरू कर दिया है। उनके राष्ट्रीय हित महाद्वीपीय हो गये हैं। आम जनता की सामाजिक सोच में भी परिवर्तन आया है, ...

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अमेरिकी बाज गिदद्धों में बदल गये हैं

अमेरिकी बाज गिदद्धों में बदल गये हैं

व्हार्इट हाउस, और अमेरिकी कांग्रेस के अलावा, अमेरिका की 1 प्रतिशत ऐसी आबादी, जिसके पास 95 प्रतिशत आम आमेरिकी की कुल सम्पतित से भी ज्यादा संपतित है। संयुक्त राज्य अमेरिका और उसकी संस्कृति को, अब तक के दुनिया की, सर्वश्रेष्ठ ...

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अफ्रीका को सैनिक छावनी में बदलने का अभियान

अफ्रीका को सैनिक छावनी में बदलने का अभियान

अफ्रीका के 35 से ज्यादा देशों के लिये पेण्टागन ने वर्ष 2013 के सैन्य कार्यक्रमों की घोषणा की है। उसने कहा है कि ”2013 में अफ्रीका के 35 से ज्यादा देशों में अमेरिकी सेना की ‘स्माल आर्मी टीम’ भेजी जायेगी, ...

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रूस पूर्व सोवियत संघ की ओर लौट रहा है?

रूस पूर्व सोवियत संघ की ओर लौट रहा है?

अमेरिका और रूस के बीच, दो दशक की चुप्पी और संबंधों को सामान्य बानाने की कोशिशें, फिर उलझने लगी हैं। सोवयित संघ के विघटन के बाद, शीतयुद्ध के समापित की घोषणा महज स्थगन प्रस्ताव था। अमेरिकी साम्राज्य ने जिसे अपने ...

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लडकियां ही पीढि़यों की गोद होती हैं

लडकियां ही पीढि़यों की गोद होती हैं

”भारत में शराब पीना बुरी बात है।” ”अमेरिका में?” ”राजनीतिक दलों के बारे में कहा जाता है कि ‘दो बोतल में एक ही शराब है।’ ” ”मतलब?” आप चाहे जिस बोतल की शराब पीयें, अमेरिका में कोर्इ बात नहीं, मगर ...

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क्या हम, तीसरे विश्वयुद्ध के मुहाने पर खड़े हैं? – 3

क्या हम, तीसरे विश्वयुद्ध के मुहाने पर खड़े हैं? – 3

विश्व परिदृश्य बदल गया है। एक ओर नवउदारवादी वैश्वीकरण है, जिनके पीछे एकाधिकारवादी शकितयां हैं। किंतु इन शकितयों के पीछे भी रूस और चीन जैसी एकाधिकारवादी शकितयां हैं। जो बहुध्र्रुवी विश्व की अवधारणा का साथ दे रहे हैं। दूसरी ओर ...

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वालमार्ट- जो जायज है, वही नाजायज है

वालमार्ट- जो जायज है, वही नाजायज है

भारतीय संसद में कर्इ सवाल खड़े हैं। सवालों की बड़ी भीड़ है। एक दूसरे को धकिया कर आगे निकलने की कोशिश करते हुए सवाल हैं। सवालों की भी अपनी परेशानियां हैं। एक सवाल दूसरे से पिछड़ जाता है, दूसरा सवाल ...

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आज की दुनिया, सोवियत संघ के विघटन के बाद की दुनिया है

आज की दुनिया, सोवियत संघ के विघटन के बाद की दुनिया है

बीसवीं सदी के अंतिम दशक में, 25 दिसम्बर 1991 को सोवियत संघ का विघटन हुआ। और 30 दिसम्बर 2006 को, इराक में सददाम हुसैन को फांसी दे दी गयी, इराक का पतन हुआ। आज की दुनिया अमेरिकी साम्राज्य के पतन ...

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सेना नहीं सरकारें तख्ता पलटती हैं

सेना नहीं सरकारें तख्ता पलटती हैं

भारत की वित्तव्यवस्था और बाजार पर कब्जा जमाने और उसकी राजनीतिक संरचना को प्रभावित करने की जो कोशिशें हो रही हैं, वह नवउदारवादी वैश्वीकरण और मुक्त बाजारवादी उदारीकरण की नीतियों का परिणाम है। केंद्र की यूपीए सरकार भ्रष्टाचार के सुलगते ...

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जनतंत्र के लिये, जनसंघर्ष जरूरी है

जनतंत्र के लिये, जनसंघर्ष जरूरी है

आम आदमी के हितों से जुड़े मुददों पर राजनीतिक दलों के हितों की सवारी, भारतीय संसद की विशेषता बन गयी है। देश में एक भी राजनीतिक दल ऐसा नहीं है, जो कह सके कि वह आम आदमी के हितों के ...

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