सामाजिक समस्याओं का निजीकरण

सामाजिक समस्याओं का निजीकरण

‘दिल्ली गैंगरेप’ ने कर्इ सवालों को सतह के ऊपर ला दिया है। यह सोचने के लिये विवश कर दिया है कि तमाम आर्थिक एवं राजनीतिक परिवर्तन के बाद भी, समाज की आधी आबादी की हालत वह नहीं है, जो ऊपर ...

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भारत-पाक – बुलेटप्रूफ कण्टेनर में बैठकर क्रांति

भारत-पाक – बुलेटप्रूफ कण्टेनर में बैठकर क्रांति

भारत और पाकिस्तान के बीच, युद्धविराम और शांतिवार्ता के दौरान भी, युद्ध और आतंक की सिथतियां बनी रहती हैं। सीमा विवाद और कश्मीर का मुददा दोनों ही देशों के बीच खड़ा रहता है। पाकिस्तान आज तक स्वीकार नहीं कर सका ...

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संस्कृति का स्वरूप, महाद्वीपीय हो रहा है

संस्कृति का स्वरूप, महाद्वीपीय हो रहा है

संस्कृति की चर्चा हम चाहे जिस रूप में करें, वह विभाजित ही रहेगी, क्योंकि समाज विभाजित है, परिवेश विभाजित है, भौगोलिक परिसिथतियां विभाजित हैं और इन सबसे निर्मित सोच विभाजित है। संस्कृति के कैनवास को लोग हमेशा बड़ा कर देते ...

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लातिनी अमेरिकी देशों की महाद्वीपीय एकजुटता

लातिनी अमेरिकी देशों की महाद्वीपीय एकजुटता

लातिनी अमेरिकी देशों की महाद्वीपीय एकजुटता, उनके हर एक निर्णय और उनकी हर एक गतिविधियों में, साफ तौर पर नजर आने लगी है। जिसके मूल में विकास के जरिये समाजवाद और बोलिवेरियन क्रांति है। राज्य को सामाजिक विकास की अनिवार्यता ...

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राजसत्ता के लिये, राजनीतिक बाजी

राजसत्ता के लिये, राजनीतिक बाजी

हम यह मानते हैं कि मौजूदा आर्थिक, सामाजिक एवं राजनीतिक परिदृश्य को बदलने का काम, देश की आम जनता कर सकती है। हमारी अपेक्षायें किसी भी राजनीतिक दल, संगठन या मुददों को खड़ा करके, उन्हें लावारिश छोड़ने वालों से नहीं ...

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क्या हम, तीसरे विश्वयुद्ध के मुहाने पर खड़े हैं? – 4

क्या हम, तीसरे विश्वयुद्ध के मुहाने पर खड़े हैं? – 4

सीरिया और र्इरान के मुददे ने दुनिया को तात्कालिक रूप से विभाजित ही नहीं कर दिया है, बलिक यह भी प्रमाणित कर दिया है कि ”अब अमेरिकी साम्राज्यवाद को दी जाने वाली छूट का अंत भी जरूरी है।” रूस के ...

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चुनाव की देहरी पर चिन्तन

चुनाव की देहरी पर चिन्तन

जयपुर चिन्तन-शिविर में कांग्रेस के कपाल पर चिन्ता की गाढ़ी लकीरे उभरी हुर्इ दिखीं। राहुल गांधी के शब्दों में धार कम भावुकता अधिक थी। फिर भी, पार्टी के रवैए और कार्यप्रणाली के बारे में वे फरमा सही रहे थे। ऊपरी ...

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राजनीतिक हिंसा की दो वारदातें

राजनीतिक हिंसा की दो वारदातें

सामाजिक हिंसा के बाद, राजनीतिक हिंसा की दो घिनौनी तस्वीरें हमारे सामने आयी हैं। 8 जनवरी 2013 को जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में, मेंढर सेक्टर के मनकोट इलाके में, पाकिस्तानी सैनिकों ने भारतीय सेना के दो जवानों का सिर धड़ ...

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यूरोप का आम आदमी यूरोपीय संघ के खिलाफ है

यूरोप का आम आदमी यूरोपीय संघ के खिलाफ है

यूरोप का संकट रोज बढ़ रहा है। आर्थिक असमानता, राजनीतिक असंतोष और बिगड़ती हुर्इ सामाजिक सिथतियों में खत्म होती सुधार की उम्मीदों ने लोगों को हतास कर दिया है। सरकारें आम जनता का विश्वास खो दी हैं, और तमाम कोशिशों ...

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अफगानिस्तान के मादक पदार्थों पर अमेरिकी वर्चस्व

अफगानिस्तान के मादक पदार्थों पर अमेरिकी वर्चस्व

अफगानिस्तान में 4 लाख 60 हजार अफगान बेघरबार शरणार्थी हैं। अपने ही देश में शरणार्थियों की तरह जी रहे हैं। और दूसरे देशों में जहां भी वो हैं, उन पर या तो गहरी नजर रखी जाती है, या उन्हें वहां ...

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