सेना नहीं सरकारें तख्ता पलटती हैं

सेना नहीं सरकारें तख्ता पलटती हैं

भारत की वित्तव्यवस्था और बाजार पर कब्जा जमाने और उसकी राजनीतिक संरचना को प्रभावित करने की जो कोशिशें हो रही हैं, वह नवउदारवादी वैश्वीकरण और मुक्त बाजारवादी उदारीकरण की नीतियों का परिणाम है। केंद्र की यूपीए सरकार भ्रष्टाचार के सुलगते ...

Read More »

जनतंत्र के लिये, जनसंघर्ष जरूरी है

जनतंत्र के लिये, जनसंघर्ष जरूरी है

आम आदमी के हितों से जुड़े मुददों पर राजनीतिक दलों के हितों की सवारी, भारतीय संसद की विशेषता बन गयी है। देश में एक भी राजनीतिक दल ऐसा नहीं है, जो कह सके कि वह आम आदमी के हितों के ...

Read More »

भारत में विकास के जरिये समाजवाद-6

भारत में विकास के जरिये समाजवाद-6

व्यापक जनाधार वाले जनतंत्र के लिये, जनधु्रवीकरण की अनिवार्यता पहले से ज्यादा, बढ़ गयी है, क्योंकि पूंजीवादी जनतंत्र में, राजनीतिक धु्रवीकरण की सिथतियां बदल गयी हैं। आम जनता के हितों की बातें तो की जाती हैं किंतु राजसत्ता के लिये, ...

Read More »
Scroll To Top