रूस पूर्व सोवियत संघ की ओर लौट रहा है?

रूस पूर्व सोवियत संघ की ओर लौट रहा है?

अमेरिका और रूस के बीच, दो दशक की चुप्पी और संबंधों को सामान्य बानाने की कोशिशें, फिर उलझने लगी हैं। सोवयित संघ के विघटन के बाद, शीतयुद्ध के समापित की घोषणा महज स्थगन प्रस्ताव था। अमेरिकी साम्राज्य ने जिसे अपने ...

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लडकियां ही पीढि़यों की गोद होती हैं

लडकियां ही पीढि़यों की गोद होती हैं

”भारत में शराब पीना बुरी बात है।” ”अमेरिका में?” ”राजनीतिक दलों के बारे में कहा जाता है कि ‘दो बोतल में एक ही शराब है।’ ” ”मतलब?” आप चाहे जिस बोतल की शराब पीयें, अमेरिका में कोर्इ बात नहीं, मगर ...

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क्या हम, तीसरे विश्वयुद्ध के मुहाने पर खड़े हैं? – 3

क्या हम, तीसरे विश्वयुद्ध के मुहाने पर खड़े हैं? – 3

विश्व परिदृश्य बदल गया है। एक ओर नवउदारवादी वैश्वीकरण है, जिनके पीछे एकाधिकारवादी शकितयां हैं। किंतु इन शकितयों के पीछे भी रूस और चीन जैसी एकाधिकारवादी शकितयां हैं। जो बहुध्र्रुवी विश्व की अवधारणा का साथ दे रहे हैं। दूसरी ओर ...

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वालमार्ट- जो जायज है, वही नाजायज है

वालमार्ट- जो जायज है, वही नाजायज है

भारतीय संसद में कर्इ सवाल खड़े हैं। सवालों की बड़ी भीड़ है। एक दूसरे को धकिया कर आगे निकलने की कोशिश करते हुए सवाल हैं। सवालों की भी अपनी परेशानियां हैं। एक सवाल दूसरे से पिछड़ जाता है, दूसरा सवाल ...

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आज की दुनिया, सोवियत संघ के विघटन के बाद की दुनिया है

आज की दुनिया, सोवियत संघ के विघटन के बाद की दुनिया है

बीसवीं सदी के अंतिम दशक में, 25 दिसम्बर 1991 को सोवियत संघ का विघटन हुआ। और 30 दिसम्बर 2006 को, इराक में सददाम हुसैन को फांसी दे दी गयी, इराक का पतन हुआ। आज की दुनिया अमेरिकी साम्राज्य के पतन ...

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सेना नहीं सरकारें तख्ता पलटती हैं

सेना नहीं सरकारें तख्ता पलटती हैं

भारत की वित्तव्यवस्था और बाजार पर कब्जा जमाने और उसकी राजनीतिक संरचना को प्रभावित करने की जो कोशिशें हो रही हैं, वह नवउदारवादी वैश्वीकरण और मुक्त बाजारवादी उदारीकरण की नीतियों का परिणाम है। केंद्र की यूपीए सरकार भ्रष्टाचार के सुलगते ...

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जनतंत्र के लिये, जनसंघर्ष जरूरी है

जनतंत्र के लिये, जनसंघर्ष जरूरी है

आम आदमी के हितों से जुड़े मुददों पर राजनीतिक दलों के हितों की सवारी, भारतीय संसद की विशेषता बन गयी है। देश में एक भी राजनीतिक दल ऐसा नहीं है, जो कह सके कि वह आम आदमी के हितों के ...

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भारत में विकास के जरिये समाजवाद-6

भारत में विकास के जरिये समाजवाद-6

व्यापक जनाधार वाले जनतंत्र के लिये, जनधु्रवीकरण की अनिवार्यता पहले से ज्यादा, बढ़ गयी है, क्योंकि पूंजीवादी जनतंत्र में, राजनीतिक धु्रवीकरण की सिथतियां बदल गयी हैं। आम जनता के हितों की बातें तो की जाती हैं किंतु राजसत्ता के लिये, ...

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