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अमेरिका और क्यूबा – आपसी सम्बंधों की दिशा

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असफल नीतियों और आपसी सम्बंधों के मूल में यदि विचार और विपरीत समाज व्यवस्था हो, तो सम्बंधों की बहाली के सामने विपरीत परिस्थितियां ही होती हैं। दूतावास स्तर पर अमेरिका ओर समाजवादी क्यूबा के राजनीतिक संबंधों की पुर्नस्थापना के सामने कुछ ऐसी ही स्थितियां हैं। सोच और समाज व्यवस्था तथा वैश्विक अनिवार्यता के स्तर पर इस बात की संभावना कम ही बनती है, कि अमेरिकी नीतियों में परिवर्तन की कोई गुंजाईश है। और यदि महाद्वीपीय स्तर पर क्यूबा की जिम्मेदारियों की बात करें, तथा वैश्विक स्तर पर ‘21वीं सदी के समाजवाद’ के जिन दायित्वों के तहत क्यूबा ने अपनी समाज व्यवस्था का निर्माण किया है, उसे देखते हुए यदि उसकी बात करें तो उसके बदलने की आशंका भी कम ही है।

ऐसी स्थिति में दो विपरीत समाज व्यवस्था के बीच आपसी रिश्तों की बहाली का क्या अर्थ है?

समाज व्यवस्था के आधार पर विश्व संक्रमण की स्थिति में है।

पूंजीवादी साम्राज्यवाद अपने विकास की चरम अवस्था है। वैश्विक वित्तीय पूंजी ने दुनिया के ज्यादातर देशों की सरकारों पर वित्तीय वर्चस्व हासिल कर लिया है। अमेरिका पूरी तरह उनकी गिरफ्त में है। वाॅल स्ट्रीट ने व्हाईट हाउस और अमेरिकी कांग्रेस को ही नहीं अमेरिकी फेडरल रिजर्व और अपने बैंकों एवं वित्तीय इकाईयों के माध्यम से विश्व व्यापार, विकास और मुद्रा बाजार पर अधिकार जमा लिया है। एक देश की हैसियत से अमेरिका की स्थिति यूरोपीय देश ग्रीस से भी गयी-बीती है। उसके पास अपना कुछ भी नहीं है। वह वित्तीय पूंजी का गुलाम देश है। जिसके निशाने पर गैर-पूंजीवादी और समाजवादी देश हैं। जिन्हें अपनी अर्थव्यवस्था के सांचे में ढ़ालना ही उसका मकसद है।

मार्क्सवादी सोच और समाजवाद के बारे में हम नहीं कह सकते कि वह असंदर्भित हो गया है, इसके बाद भी यह सच है, कि पूंजीवाद की तरह ही समाजवाद का स्वरूप बदल चुका है। और यह स्वाभाविक है, क्योंकि सोवियत संघ के पतन के साथ ही वैश्विक समाजवाद की वैकल्पिक व्यवस्था वास्तविक रूप में नहीं है। वह पूंजीवादी विश्व में द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय सम्बंधों के आधार पर अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने की लड़ाई लड़ रहा है। यदि इस रूप में देखें तो क्यूबा की समाजवादी क्रांति ‘विकास के जरिये समाजवाद’ के रूप में, अब संक्रमण की अवस्था में है। अपने अस्तित्व को बचाये रखने के लिये उसके सामने संवाद की राजनीति की अनिवार्यता है। यह अनिवार्यता रोज बढ़ती जा रही है, क्योंकि आर्थिक हमलों के साथ तख्तापलट के षड़यंत्रों का उसे सामना करना पड़ रहा है।

यदि क्यूबा के पास वैश्विक जनसमर्थन, विश्व समुदाय से गहरे रिश्ते, रूस और चीन की मित्रता और महाद्वीपीय एकजुटता का आधार नहीं होता तो आज संयुक्त राज्य अमेरिका से दूतावास स्तर के सम्बंधों की जमीन नहीं होती, क्यूबा की समाजवादी सरकार का तख्तापलट साम्राज्यवादी ताकतें बहुत पहले कर चुकी होतीं। और लातिनी अमेरिका एवं कैरेबियन देशों की जो चुनौती अमेरिकी सरकार के सामने है, वह चुनौती ही नहीं होती। दक्षिण अमेरिका को अमेरिकी बैकयार्ड समझने की नीतियां ही नहीं बदलतीं।

कल तक दक्षिण अमेरिका अमेरिकी बैकयार्ड था, आज उसकी नीतियां उसे अपना बैकयार्ड बनाने की हैं। बराक ओबामा क्यूबा से राजनीतिक सम्बंधों की पुर्नस्थापना कर लातिनी अमेरिका और कैरेबियन देशों से अमेरिकी हित में, सम्बंधों को बढ़ाने की नीति पर अमल कर रहे हैं, और यह चिल्ला रहे हैं, कि वो क्यूबा से अपने सम्बंधों को सामान्य बनाने के लिये आवश्यक कदम उठा रहे हैं, मगर सच यह है कि वो क्यूबा के जरिये महाद्वीप के देशों से, बिना अपनी नीतियों में आवश्यक सुधार किये, सम्बंधों को बढ़ाना चाहते हैं। जहां रूस और चीन की प्रभावशाली उपस्थिति पहले से है।

ओबामा के लिये क्यूबा ऐसा गलियारा है जिसे पार कर के वो लातिनी अमेरिका और कैरेबियन देशों तक मित्र देश की हैसियत से पहुंचना चाहते हैं। वो चाहते हैं कि आर्थिक हमले, राजनीतिक अस्थिरता फैलाने की साजिशें और तख्तापलट जैसी कार्यवाहियां भी होती रहें, और अमेरिका मित्र देश का दर्जा हासिल कर ले।

क्यूबा स्थित अमेरिकी दूतावास ने एक वक्तव्य जारी कर कहा कि- ‘‘दोनों देशों ने अधिकृत रूप से अपने सम्बंधों की पुर्नस्थापना करते हुए अपने कूटनीतिकों को हवाना और वाशिंगटन भेजा है।‘‘ वक्तव्य में कहा गया है कि ‘‘राष्ट्रपति बराक ओबामा के द्वारा 1 जुलाई, 2015 को की गयी घोषणां आज (20 जुलाई) प्रभावी हुई है। संयुक्त राज्य अमेरिका और क्यूबा ने अपने कूटनीतिक सम्बंधों को फिर से स्थापित किया है।‘‘ वक्तव्य में राष्ट्रपति बराक ओबामा के इस वक्तव्य का उल्लेख किया गया है, कि ‘‘विदेश मंत्री जाॅन कैरी इस गर्मी में हवाना की यात्रा पर जायेंगे। और अमेरिकी झण्डा को दूतावास में लहराने के समारोह में भाग लेंगे।‘‘

क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोडरीज ने दोनों देशों के बीच के विवादित मुद्दों को स्पष्ट करते हुए कहा- ‘‘सिर्फ और सिर्फ आर्थिक, व्यापारिक और वित्तीय प्रतिबंधों को खत्म करने, जिसकी वजह से हमारे लोगों को कई तकलीफों और नुक्सानों का सामना करना पड़ा है, और ग्वातेनामा को वापस कर के और क्यूबा की सम्प्रभुता का सम्मान कर के ही दोनों देशों के सम्बंधों को सामान्य किया जा सकता है। इस ऐतिहासिक क्षण का, जिसके हम गवाह हैं, कोई मतलब हो सकता है।‘‘ क्यूबाई विदेश मंत्री ने अमेरिका के सत्ता परिवर्तन (तख्ता पलट) की नीति की ओर इशरा करते हुए कहा, कि ‘‘हम फिर से इस बात की पुष्टि करते हैं कि क्यूबा संयुक्त राज्य के साथ सकारात्मक रूप से सम्बंधों को सामान्य करना चाहता है, मगर हमारी स्वतंत्रता या किसी भी तरह के हस्तक्षेप को हम स्वीकार नहीं करेंगे।‘‘

अमेरिका के संदर्भ में जिसकी संभावना कम है। आर्थिक, व्यापारिक एवं वित्तीय सम्बंधों की पुर्नस्थापना के किश्तों में आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना तय है, लेकिन ग्वातेनामा और अहस्तक्षेप का मामला ऐसा है, जिससे क्यूबा की सरकार आश्वस्त नहीं हो सकती। ना ही अमेरिकी सरकार की यह नीति है।

अमेरिकी विदेश मंत्री जाॅन कैरी ने ग्वातेनामा-बे के संदर्भ में कहा- ‘‘हम समझ सकते हैं कि इस मुद्दे पर क्यूबा की भावनायें जुड़ी हुई हैं, जो काफी मजबूत हैं, किंतु मैं यह नहीं कह सकता कि आने वाला कल हमारे सामने क्या लायेगा? हां, इस समय यह हमारे लिये बहंस का मुद्दा नहीं है।‘‘ उन्होंने आगे कहा- ‘‘हमारे बीच ऐसी कई चीजें हैं जिसे क्यूबा होते हुए देखना चाहता है।‘‘

और यह देखना दोनों देशों के अलग-अलग हितों से जुड़ा है, उन अनिवार्यताओं से जुड़ा है, आज की तारीख में जो एक दूसरे के विपरीत है।

अमेरिका सम्बंधों को सुधारने के गहरे दबाव में है, और यह दबाव क्यूबा पर भी कम नहीं है। इस लिये सम्बंधों की यह अनिवार्यता आपसी महाद्वीपीय एवं वैश्विक स्तर पर, सवालों के दायरे में है। जिसके बारे में यकीन के साथ यह नहीं कहा जा सकता है, कि यह कितना सही है, या कितना गलत है?

क्यूबा के लिये समाजवाद, लातिनी अमेरिकी एवं कैरेबियन देशों की एकजुटता और आर्थिक एवं सामाजिक विकास योजनाओं तथा कूटनीतिक एवं सामरिक सुरक्षा के लिये रूस और चीन का जितना महत्व है, संयुक्त राज्य अमेरिका के लिये उसे तोड़ने और अमेरिकी वर्चस्व को स्थापित करने की अनिवार्यता है। जिसके बिना अमेरिकी एकाधिकार संभव नहीं है।

वैश्विक स्तर पर क्यूबा बहुध्रुवी विश्व की अवधारणा का पक्षधर है, जो अमेरिकी वैश्वीकरण और एकाधिकारवाद के विरूद्ध है।

‘अल्बा‘ और अन्य क्षेत्रीय संगठनों सहित ‘कम्यूनिटी आॅफ लैटिन अमेरिकन स्टेट्स‘ ने दोनों देशों के आपसी सम्बंधों की बहाली का स्वागत क्यूबा के पक्ष में किया है। अमेरिका समर्थित ‘आर्गनाइजेशन आॅफ अमेरिकन स्टेट्स‘ ने भी इसे ऐतिहासिक करार दिया है।

हम इस बात को अच्छी तरह जानते हैं, कि मौजूदा सदी का यह दशक पूंजीवादी साम्राज्यवाद का चरम और समाजवादी सोच के सामने संक्रमण की स्थितियों का है। इसके बाद भी हमारे लिये यह गंभीर सवाल है, कि क्या क्यूबा में फिदेल कास्त्रो युग का अंत हो रहा है?

13 जुलाई 2015 को क्यूबा के पार्लियामेण्ट रिपोर्ट में 23 क्यूबन स्टेट कम्पनियों को बंद करने की घोषणां की गयी है, यह कहा गया है, कि राज्य के द्वारा संचालित कम्पनियां आर्थिक रूप से घाटे में चल रही थीं। रिपोर्ट के अनुसार ‘‘आने वाले दो सालों में घाटे में चलने वाली ऐसी ही 56 कम्पनियों और इकाईयों को पूरी तरह बंद किया जायेगा।‘‘

क्या क्यूबा की अर्थव्यवस्था में निजी कम्पनियों और वित्तीय इकाईयों के लिये जगह बनाई जा रही है?

इस बारे में विस्तार से बातें हम बाद में करेंगे। यह जरूरी है। समाजवाद और 21वीं सदी के समाजवाद के लिये यह जरूरी है।

जाॅन कैरी की क्यूबा यात्रा-

14 अगस्त को अमेरिकी विदेश मंत्री जाॅन कैरी सुबह 9 बजे हवाना के जोश माॅटी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा पर पहुंचे। उनके साथ 20 लोगों का उच्च स्तरीय वाणिज्य एवं कूटनीतिक प्रतिनिधि मण्डल भी था। जिसमें पश्चिमी गोलार्द्ध सम्बंधों की सचिव राॅबर्टा जैकब्सन, वाणिज्य विभाग के उपसचिव बुस एण्ड्रूस और कोषागार के उपसचिव साराह प्लोम रस्किन थे। पिछले 70 सालों के बाद किसी अमेरिकी विदेश मंत्री की यह पहली यात्रा थी।

हवाना में अमेरिकी दूतावास को फिर से खोलने के उद्घाटन समारोह की शुरूआत रिचर्ड ब्लाको की कविता के बाद, अमेरिका और क्यूबा के राष्ट्रगान के साथ हुई। अमेरिकी सरकार के आग्रह पर, जिन 3 नौसैनिकों ने 1961 में अमेरिकी झण्डे को झुकाया था, उन्होंने ही उसे फिर से लहराने का काम किया।

अमेरिकी विदेश मंत्री जाॅन कैरी ने कहा- ‘‘दूतावास पर इस झण्डे का लहराना -54 सालों बाद- कूटनीतिक सम्बंधों के पुर्नस्थापना का प्रतीक है। मैं यहां घर जैसा ही महसूस कर रहा हूं, क्योंकि यह वास्तव में एक यादगार समारोह है। आज का दिन एक ऐसा दिन है, जिस दिन पुराने बेरियर को हटा कर नई संभावनाओं की खोज की जा रही है।‘‘

स्पेनिश में बोलते हुए उन्होंने कहा- ‘‘आपसी सम्बंधों में खतरे की या डर की कोई बात नहीं है। दोनों देशों के बीच व्यापार होगा और दोनों देशों के लोग एक-दूसरे को अच्छी तरह समझ पायेंगे।‘‘ उन्होंने जानकारी दी कि अमेरिकी लोगों के क्यूबा यात्रा की दर में 35 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा- ‘‘पिछली आधी सदी से भी ज्यादा समय तक हमारे सम्बंध स्थगित रहे हैं। इस बीच एक नयी पीढ़ी का विकास हुआ है। इस दौरान 10 अमेरिकी राष्ट्रपति आये, अब हमारा समय आ गया है, और हम समझते हैं कि अमेरिका और क्यूबा के बीच का अलगाव सही नहीं है। हमें एक आशाजनक दिशा की ओर बढ़ना है।‘‘

जाॅन कैरी ने इस पीढ़ीयों के बदलने, अमेरिकी राष्ट्रपतियों के गुजरने और आशाजनक दिशा की ओर बढ़ने की बातों के बाद उन्होंने कुछ ऐसी बातें भी की, जो आपसी सम्बंधों के बीच क्यूबा के लिये खतरों को बढ़ाने वाला है। उन्होंने कहा- ‘‘क्यूबा के भविष्य का निर्माण क्यूबा के लोग ही करेंगे लेकिन उन्हें यह जान लेना चाहिए कि संयुक्त राज्य हमेशा लोकतांत्रिक सिद्धांतों (आदर्शों) और ऐसे ही बदलाव का विजेता रहा है। हम इस बात पर विश्वास रखते हैं, कि क्यूबा के लोगों का विकास एवं उनकी सेवा की सही दिशा वास्तविक लोकतंत्र है।‘‘ जिसका अमेरिका चैम्पियन है और जहां वैश्विक वित्तीय ताकतों की चलती है। जिसपर फेडरल रिजर्व पर कब्जा है, और अमेरिकी कांग्रेस से लेकर व्हाईट हाउस तक कहा मानने के लिये विवश है।

क्यूबा के लोकतंत्र पर तंज करने वाले अमेरिकी विदेश मंत्री एक ऐसे देश का प्रतिनिधित्व करते हैं, जहां पुलिस काले लोगों की हत्या करती है, और ऐसे हत्यारों को अमेरिकी अदालतें सजा तक नहीं दे पातीं। अमेरिका में ऐसे लोगों की बड़ी संख्या है जो मतदान करने और अपना प्रतिनिधि चुनने के अधिकार से वंचित हैं।

जाॅन कैरी का यह वक्तव्य इस बात का स्पष्ट संकेत है, कि अमेरिका अपनी हरकतों से बाज नहीं आयेगा और अमेरिकी दूतावास सत्ता परिवर्तन की साजिशों का केन्द्र ही बनेंगा। जाॅन कैरी ने अमेरिका के द्वारा क्यूबा पर लगाये गये आर्थिक प्रतिबंधों को हटाये जाने के पक्ष में बातें की और उसे अमेरिकी कांग्रेस के मत्थे मढ़ दिया। उन्होंने कहा- ‘‘आर्थिक प्रतिबंधों को कांग्रेस की स्वीकृति से ही हटाया जा सकता है, जिसके पक्ष में हम सभी हैं।‘‘

उद्घाटन समारोह के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री जाॅन कैरी ने क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रुनो रोडरिज से मुलाकात की। दोनों ने एक ‘लाइव प्रेस कांफ्रेंस‘ भी किया।

इस संयुक्त प्रेस वार्ता में क्यूबा के विदेश मंत्री ने क्यूबा की उपलब्धियों के प्रति गर्व व्यक्त किया और अमेरिका से अच्छे संबंधों की अपेक्षा व्यक्त की। जाॅन कैरी ने क्यूबा पर लगाये गये आर्थिक प्रतिबंधों को समाप्त करने की संभावनायें व्यक्त की।

ब्रुनो रोडरिज ने कहा- ‘‘दोनों देशों की सरकारों के बीच के मतभेदों के बावजूद यह संभव है, कि सभ्य, सम्मानिक और सकारात्मक सम्बंधों को स्थापित किया जा सके।‘‘ उन्होंने यह भी कहा, कि ‘‘दोनों देशों के बीच गहरे मतभेद और असमानतायें हैं। वैचारिक भिन्नता है।‘‘ उन्होंने राष्ट्रीय सम्प्रभुसत्ता, लोकतंत्र, मानवाधिकार और अंतर्राष्ट्रीय अधिकारों का विशेष उल्लेख किया, और यह भी उल्लेख किया कि ‘‘आपसी सम्बंधों को बढ़ाने की राहें मुश्किल हैं, इसके बाद भी दोनों देश एक-दूसरे के दृष्टिकोण को समझने के लिये एक कमीशन बनाने पर सहमत हुए हैं।‘‘ उन्होंने क्यूबा पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को समाप्त करने और दशकों से लगे प्रतिबंधों की वजह से क्यूबा और क्यूबावासियों के आर्थिक क्षति के लिये क्षतिपूर्ति की पेशकश की।

यूनाईटेड नेशंस के ‘इकोनाॅमिक कमीशन फाॅर लैटिन अमेरिका एण्ड कैरेबियन्स‘ के अनुसार – ‘‘1960 में 2014 के बीच अमेरिका के द्वारा लगाये गये आर्थिक प्रतिबंधों की वजह से क्यूबा को 117 बिलियन डाॅलर का नुक्सान हुआ है।‘‘ उसकी एक्जिक्यूटिव सेक्रेटरी एलिसिया बारसेना ने कहा है कि ‘‘राष्ट्रसंघ के जनरल असेम्बली में हमने गणना की है कि इस आर्थिक प्रतिबंध की वजह से क्यूबा को लगभग 117 बिलियन डाॅलर का नुक्सान हुआ है।‘‘

अमेरिकी विदेश मंत्री जाॅन कैरी ने यह स्वीकार किया कि ‘‘हमें यह मान लेना चाहिए कि प्रतिबंधों के द्वारा क्यूबा को अलग-थलग करने की नीतियां असफल रही हैं। उनकी वजह से क्यूबा नहीं बल्कि इस मुद्दे पर अमेरिका ही अलग-थलग पड़ गया।‘‘ उन्होंने कहा- ‘‘मैं यह नहीं देख पा रहा हूं कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के द्वारा उठाये गये इस कदम को, अमेरिका का आने वाला कोई भी राष्ट्रपति बदलना चाहेगा।‘‘ उन्होंने ग्वातेनामा पर अमेरिकी अधिकार के बारे में कहा कि ‘‘हमारी ऐसी कोई योजना नहीं है, कि हम ग्वातेनामा पर अपने कब्जे को छोड़ दें।‘‘

क्यूबा के विदेश मंत्री रोडरिज ने अमेरिकी रंग-भेद एवं नस्लवादी नीति, पुलिस की क्रूरता, दमन एवं यातना तथा दूसरे देशों में सैन्य हस्तक्षेप और निजी हितों के लिये राजनीति में अनुचित दिलचस्पी पर अपनी चिंता व्यक्त की। जिस मानवाधिकार और लोकतंत्र के नाम पर अमेरिकी सरकार अपने द्वारा चलाये जा रहे अभियानों को जायज ठहराता है, क्यूबा में उसी मानवाधिकार की रक्षा के लिये उठाये गये कदमों का उन्होंने जिक्र करते हुए कहा- ‘‘लम्बे प्रतिबंधों के बाद भी क्यूबा ने इस क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं, जिसमें शिक्षा और स्वास्थ्य एवं चिकित्सा भी शामिल है।‘‘

अमेरिका और क्यूबा के बीच दूतावास स्तर के राजनीतिक सम्बंधों की पुर्नस्थापना के बाद भी दोनों देशों के बीच राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के अनगिनत मतभेदों के मुद्दे हैं। वास्तव में यह एक ऐसे सम्बंध की शुरूआत है जिसमें दोनों के अलग-अलग हित और दांवपेंच हैं। देखना यह है, कि आने वाला कल क्या तय करता है?

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