मोदी को ब्राण्ड समझना गलत नहीं

मोदी को ब्राण्ड समझना गलत नहीं

मोदी को एक ब्राण्ड समझना गलत नहीं है। वो देश को ब्राण्ड बना रहे हैं। देशभक्ति की ब्राण्डिंग कर रहे हैं, और देशद्रोह की भी। जिसे आने वाले कल में तब समझा जाएगा, जब हम देश की दुर्दशा की बात ...

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सीरिया को बचाने की लड़ाई

सीरिया को बचाने की लड़ाई

सीरिया को बचाने की लड़ाई विश्व समुदाय को लड़नी ही चाहिए, क्योंकि जिन आधारहीन आरोपों के तहत सीरिया पर अमेरिकी हमले की शुरूआत हो गयी है, वह सीरिया को इराक और लीबिया बनाने की नयी पहल है। जिसमें यूरोपीय देश ...

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सीरिया का संकट

सीरिया का संकट

इराक में 2003 से अब तक अमेरिका घातक -रासायनिक एवं जैविक- हथियार ढ़ूंढ़ रहा है जो नहीं मिला, मगर जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने इराक को तबाह कर दिया, सद्दाम हुसैन को फांसी दी और एक मिलियन से ज्यादा इराकियों को ...

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समाजवादी क्रांति और सोवियत संघ के पतन के बाद – 2

समाजवादी क्रांति और सोवियत संघ के पतन के बाद – 2

पूंजीवाद का संकटग्रस्त होना समाजवादी सर्वहारा क्रांति की ऐतिहासिक अनिवार्यता है, किंतु समाजवाद के सामने भी गंभीर संकट है। यह सवाल है, कि सोवियत संघ का विघटन समाजवादी समाज व्यवस्था के विघटन का आखिरी पड़ाव नहीं। क्या राज्य की इजारेदारी ...

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मिट्टी होने की लड़ाई

मिट्टी होने की लड़ाई

लोहे को काट और मोड़-बांध कर खड़ा करता है वह उस इमारत का ढ़ांचा जिसकी गहरी बुनियाद में है वह मिट्टी जो लोहे से ज्यादा मजबूत और मुलायम है, जिसके खिलाफ इमारत मरे हुए ईंट-पत्थर और मरी हुई लकड़ियों से ...

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उधड़ी हुई सड़कों का चौराहा

उधड़ी हुई सड़कों का चौराहा

हम उस चौराहे पर खड़े हैं जहां से निकली और जहां तक पहुंची राहें उधड़ी हुई, बेमरम्मत हैं। ध्वस्त हैं बांये बाजू की राहें दायें बाजू विध्वंस है। चौराहे पर टंगा निर्देश है- ‘बांये बाजू से चलें लालबत्ती से रूकें ...

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भाजपा की जीत स्वाभाविक नहीं

भाजपा की जीत स्वाभाविक नहीं

उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव परिणाम आने के दौरान ही बहुजन समाज पार्टी की सब कुछ मायावती ने प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर भाजपा और केन्द्र की सरकार पर चुनावी मशीन -ईवीएम- से छेड़-छाड़ करने का सीधा आरोप लगाया था। सपा ...

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मुद्दा साहित्य के छोटा या बड़ा होने का नहीं

मुद्दा साहित्य के छोटा या बड़ा होने का नहीं

साहित्य में राजनीति की बात चलती रहती है, मगर समझ यह पैदा की जाती है, कि राजनीति की बात करने से साहित्य छोटा हो जाता है। क्या वास्तव में ऐसा होता है? क्या यह साहित्य को उसके समय से काट ...

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पूंजी के वर्चस्व और राजनीतिक अराजकता का समय

पूंजी के वर्चस्व और राजनीतिक अराजकता का समय

बाजारवाद ने राज्य की सरकारों को आतंकी संगठन और समाज को मुक्त व्यापार का क्षेत्र बना दिया है। उसने समाजवादी समाज व्यवस्था के विकास की संभावनाओं को ही खत्म नहीं किया है, बल्कि जिस पूंजीवादी समाज व्यवस्था ने उसे जन्म ...

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भय की बनती सूरतें

भय की बनती सूरतें

आज सरकार और सरकार समर्थक मीडिया के किसी भी बात पर यकीन करना मुश्किल हो गया है। जिसे वो आतंकवादी कहते हैं, वह आतंकवादी प्रमाणित नहीं होता। जिसे वो देशद्रोही करार देते हैं, वह देशद्रोही प्रमाणित नहीं होता। और ऐसा ...

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